वो देखते ही खिलखियाए ******* वो देखते ही खिलखिलाए, काम आ गई सारी वफाएं। मुस्करा कर नजरें मिलाई, थोड़ा थोड़ा सा वो शरमाई, बात दिल की कैसे बताएं। काम आ गई सारी वफाएं। ले हाथ,हाथ में था दबाया, खिल उठा फूल मुरझाया, हाल ए दिल क्या सुनाएं। काम आ गई सारी वफाएं। नजारा जन्नत का आया, इंगित इशारा समझ आया, भाव प्यार के कैसे छुपाएं। काम आ गई सारी वफाएं। सीधा तीर सा था निशाना, चल पाया ना कोई बहाना, जिंदा जीने की हैं आशाएं। काम आ गई सारी वफाएं। मनसीरत अदा का दीवाना, प्यारा प्रेम का वो नजराना, चहक उठी सारी दिशाएं। काम आ गई सारी वफाएं। वो देखते ही खिलखिलाए, काम आ गई सारी वफाएं। ******* सुखविंद्र सिंह मनसीरत खेड़ी राओ वाली (कैथल)



