उच्च संस्कृति,तहज़ीब एवं मिठास से भरपूर है उर्दू ज़ुबान
बहुत सारा साहित्यक भंडार एवं इतिहास से जुड़ी चीज़े उर्दू भाषा मेंः नैशनल ह्यूमन राईटस सोशल जस्टिस फ्रंट
नई दिल्ली। जानकारी के अनुसार पंजाब के भाषा विभाग की ओर से एक बहुत ही हैरत अंगेज़ निर्णय लिया गया है, जिस में पंजाब सरकार ने भाषा विभागों की ओर से एक लम्बे समय से उर्दु की दी जा रही मुफ्त शिक्षा पर पाबंदी लगा दी है। इस पूरे मामले के बारे अपनी प्रतिक्रिया वयक्त करते हुए उर्दू भाषा के विद्वान वरिष्ठ जर्नलिस्ट, नैशनल ह्यूमन राईटस सोशल जस्टिस फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोैलाना अनवर अमृतसरी, कासमी, नदवी ने कहा कि मान सरकार का यह फैसला मेरी समझ से परे है।
उर्दू आमोज़ कलासों को खतम करने एवं फीस की अदायगी के फैसले पर नज़र ए सानी की जरूरत है, क्योंकि मान सरकार एवं भाषा विभाग के लोग शायद यह भूल रहे हैं कि उर्दू ज़ुबान उच्च संस्कृति, तहज़ीब एवं मिठास से भरपूर है। और इस का सब से ज्यादा लाभ सरकारी दफ्तरों के मुलाज़िमों विशेष रूप से माल विभाग ओैर साहित- अदब से जुड़े लोगों को होता रहा है। उर्दू की जानकारी प्राप्त करने के लिए इस कोर्स में सरकारी विभागों के मुलाज़िमों की गिनती अधिक होती थी। मोैलाना अमृतसरी ने मान सरकार को याद दिलाते हुए कहा कि वह हरगिज़ यह न भूलें कि जहां हमारा बहुत सारा साहित्यक सरमाया उर्दू में है, वहीं इतिहास से जुड़ी भी बहुत सारी चीज़े उर्दू भाषा मे ही हैं।




