चंडीगढ़। दक्षिण ऑस्ट्रेलियाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एडम किम्बर ने पंजाबी मूल के युवक तारिकजोत सिंह को अपनी पूर्व साथी जसमीन कौर की हत्या के लिए 22 साल, 10 महीने की कैद की सजा सुनाई है। तारिकजोत सिंह 2044 में पहली पैरोल के लिए पात्र होंगे और अपनी सजा पूरी होने के बाद उन्हें देश छोड़ना होगा।
समराला उपमंडल के बलाला गांव के किसान परिवार के बड़े बेटे तारिकजोत सिंह ने अपनी पूर्व प्रेमिका जसमीन कौर को 5 मार्च, 2021 को किडनैप कर लिया था और उसे कार की डिक्की में डालकर करीब 650 किलोमीटर दूर ले जाकर दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स रेंज्स में कब्र में जिंदा दफन कर दिया था।
तारिकजोत 2016 में ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड में जाकर सेटल हो गया था। भारतीय मूल की जसमीन कौर की मुलाकात भी उससे वहीं हुई थी। बाद में दोनों का ब्रेकअप हो गया था, जिसके बाद तारिकजोत से रिश्ता टूटना सहन नहीं हो पा रहा था। तारिकजोत सिंह ने जसमीन कौर के गले पर चीरे लगाने के बाद उसे एक कब्र में दफना दिया था। हालांकि इन चोटों व कब्र में डाले जाने के बाद भी उसकी मौत तुरंत नहीं हुई थी।
6 मार्च के आसपास जब उसकी मौत हुई तो उससे पहले उसे अपने आसपास के बारे में पता था। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रॉसिक्यूटर कारमेन मैटिओ ने अदालत को अवगत कराया था कि जसमीन कौर की मौत बहुत ही दर्दनाक थी। उसने अपने होश में मौत को झेला था। आरोपी तारिकजोत ने हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया था।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि समराला उपमंडल के बलाला गांव के किसान धालीवाल परिवार को बेटे को सजा होने की खबर का बीते बुधवार को ही पता चला है। सजा के बारे में सुनने के बाद उन्होंने सब कुछ भगवान पर छोड़ दिया है। तारिकजोत के एक करीबी रिश्तेदार ने आह भरते हुए कहा कि हम अपने घर से हजारों मील दूर स्थित देश की न्यायिक प्रणाली से न्याय की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पिता मोहन सिंह धालीवाल और मां जसवीर कौर धालीवाल दोनों कभी गुरबाणी का पाठ करते रहे हैं, यह कैसे हो सकता है।



