Friday, September 25, 2026
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संत सीचेवाल के प्रयासों से इराक में फंसी दो लड़कियां की वतन हुई वापसी

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अरब देशों में ट्रैवल एजेंटों द्वारा ठगी गई महिलाओं का शोषण जारी

सुल्तानपुर लोधी, ( डा सुनील धीर)।  पिछले दो महीने से इराक में फंसी 2 पंजाबी बेटियों को राज्यसभा सदस्य और पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल के प्रयासों से भारत वापस लाया गया। पीड़ित लड़कियों ने निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी पहुंचकर संत सीचेवाल का शुक्रिया अदा किया और कहा कि अगर भारतीय दूतावास ने हमारी मदद न की होती तो नारकीय जिंदगी से बाहर निकलना नामुमकिन होता। पीड़ित लड़कियों ने अपनी दुखभरी दास्तां सुनाते हुए कहा कि उनके रिश्तेदारों और ट्रैवल एजेंटों ने उन्हें ऐसे सपने दिखाए कि वे इन ठगों के जाल में फंस गईं।
वापस लौटीं जिला कपूरथला निवासी सीमा (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उनकी रिश्तेदार मीरा नामक महिला ने उनसे संपर्क किया था। मीरा ने उसे घरेलू काम बताकर ग्रीस भेजने का झांसा दिया और मोटी तनख्वाह का भी लालच दिया। लेकिन मीरा ने ग्रीस भेजने के बजाय धोखे से इसे इराक भेज दिया और वहां भी एक कंपनी को बेच दिया। उनका पासपोर्ट भी जब्त कर लिया गया। उन्होंने कहा कि जहां उन्हें रखा गया था वह एक कार्यालय था। सीमा ने कहा कि उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उनके पिता को लकवा मार जाने के कारण घर चलाना मुश्किल हो गया। इसलिए उसने मीरा की बात मानकर विदेश जाने का फैसला किया।
उसके साथ परती जिला फिरोजपुर की लड़की हेमा (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उसे भी मीरा ने फंसाया था। मीरा ने उसे हांगकांग भेजने का लालच दिया था और मोटी सैलरी का भी लालच दिया था। लेकिन उसे इराक भेज दिया गया और वहां बेच दिया गया। उन्होंने कहा कि जिस कार्यालय में उन्हें रखा गया था, वहां उन लोगों ने काफी अत्याचार किया हेमा ने दावा किया कि इराक में उनकी तरह 30 से 40 लड़कियां फंसी हुई हैं। जिन्हें ग्राहकों के सामने पेश किया जाता है और उनसे जबरदस्ती गलत काम कराया जाता है।
दोनों लड़कियों ने कहा कि उनके परिवारों ने कुछ दिन पहले पर्यावरणविद् और राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल से संपर्क किया था। उन्होंने तुरंत इस मामले को विदेश मंत्रालय और इराक में भारतीय दूतावास के समक्ष उठाया। लड़कियों ने बताया कि हमारे परिवार ने रिश्तेदारों से पैसे इकट्ठा करका उन्हें भेजा था।
राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल जी ने कहा कि दोनों लड़कियों के पीड़ित परिवारों ने कुछ दिन पहले उनसे संपर्क किया था। उन्होंने बताया था कि उनकी बेटियां इराक में फंसी हुई हैं। ट्रैवल एजेंट द्वारा उन्हें छोड़ने के लिए 10 से 12 लाख रुपये की मांग की जा रही है। इसके तुरंत बाद उन्होंने एक पत्र के जरिए इस मामले को विदेश मंत्रालय के ध्यान में लाया। जिस पर भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय ने तुरंत कार्रवाई की और ये लड़कियां करीब 20 दिनों में बिना पैसे दिए अपने घर लौट आई। उन्हों ने पंजाब के लोगों से फिर अपील की, अरब देशों में ट्रैवल एजेंटों के हाथों ठगी गई महिलाओं का शोषण जारी है। उन्हें कहा की अपनी लड़कियों को बाहर भेजने से पहले एजेंटों और वहां की स्थितियों के बारे में पूरी जांच-पड़ताल कर लेनी चाहिए ताकि लड़कियां इसका शिकार न बनें।
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लौटी लड़कियों ने विदेश जाने वाली लड़कियों और उनके परिजनों से अपील की कि वे विदेश जाने के लिए अपने किसी भी रिश्तेदार या भाई-बहन पर भरोसा न करें। उन्होंने कहा कि उन्हें ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से अरब देशों में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन देशों का माहौल बहुत खराब है। खाड़ी देशों में महिलाओं को सबसे ज्यादा निशाना बनाया जाता है। पीड़ित लड़कियों ने बताया कि ऐसा लगता है कि इस धंधे में कोई अंतरराष्ट्रीय गिरोह काम कर रहा है, जो पंजाब समेत देश के अन्य राज्यों के गरीब घरों की लड़कियों को झूठे लारों में फंसाकर बेच रहा है।

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