Sunday, April 12, 2026
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दारूस्सलाम वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा मकातिब ए दीनिया की अहमियत व ज़रूरत के विषय पर भव्य सेमीनार आयोजित

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किशनगंज  4 दिसंंबर। (साजिद हुसैन ) दारूस्सलाम दीनियात मकतब, बेलवा किशनगंज में चौथा जल्सा मकातिब ए दीनिया की अहमियत व ज़रूरत और तालीमी मुजाहिरा व तकसीम ए इनामात पर एक आम जल्सा 29/11/2023 को हुवा। जिस मे मौलाना मोहम्मद साजिद हुसैन साहब नदवी के जेरे निजमत जलसा की शुरूआत हुईं फिर मौलाना ने छात्रों का कार्यक्रम शुरू कराया। माशा अल्लाह, मकतब के छात्रों ने बहुत ही शानदार तरीके से कार्यक्रम प्रस्तुत किया। उसके बाद श्री कारी जीशान साहब और श्री कारी नुरुज्जमा साहब ने क़ुरान पाक की तिलावत से लोगों को फैज्याब किया।

फिर श्री हाफ़िज़ व कारी राफे रिज़वान साहब ने बहुत अच्छे तरीक़े से नात व मनक़बत पेश किया, जिससे महफ़िल में एक ताजगी पैदा हो गई। उसके बाद सभी अकाबिरीन व मौलानाऊं के मुबारक हथौं से पोजिशन लाने वाले छात्रों को सम्मानित किया गया। फिर हमारे रहबर और संरक्षक जनाब मौलाना। उमैर अनवर क़ासमी ने सुरजापुरी भाषा में एक शिक्षाप्रद कविता पढ़ी, जिसके बाद विशिष्ट अतिथि श्री मौलाना अज़हर-उल-इस्लाम साहब नदवी लखनऊ दामत बरकातुहुमुल आलिया का मकातिव की अहमियत पर कुरान व हदीस की रोशनी में महत्व पुर्ण भाषार्ण दिया जिसमे खास तौर पर मकातिव की अहमियत पर जोर दिया और हजरत ने फरमाया। हजरत आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर पैगंबर मुहम्मद (सलल्लाहु अलैहि व सल्लम) तक मकातिब का सिलसिला चलता रहा।

उसके बाद यह सिलसिला आज तक जारी है। और हमेशा मकतब का खयाल रखना और उसकी तमाम हालात पर ध्यान देना उम्मत के हर एक शख्स की जिम्मे दारी है और उसके बाद शादी के मौके पर देनमहर ज्यादा बांधने के नुकसानात के बारे में भी बहुत कीमती बातें सहाबाऊं के हवाले से आवाम को समझाया खास तौर पर इलाके के उलमा से मुखताब होकर फरमाया ऐसी शादियों में शामिल होने से बिल्कुल इनकार करना बहुत जरूरी है वरना हमारे माशिरे में बहुत बुराइयां पैदा होजाएगी
उसके बाद मकातिब ही पर मौलाना मुनाजिर-उल-इस्लाम मजाहिरी ने भी समझाया कि मकतब का स्थापना क्यों आवश्यक है और उदाहरण के तौर पर मकतब की आवश्यकता के बारे में जनता को समझाया। उसके बाद मौलाना उमैंर अनवर कासमी की दुआ के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ। जलसा की अध्यक्षता मौलाना इज़हार-उल-हक मजाहिरी ने की और इस जलसा का निगरानी करने वाले इसी मकतब के उस्ताद हाफ़िज़ सादिक अनवर साहब की देखरेख में हुवा। अल्हम्दु लिल्लाह इस जलसा में तमाम अहले बेलवा और आस पास के लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया ।

खास तौर पर श्री हबीबुर रहमान साहब , श्री हाफ़िज़ तनवीर साहब, श्री मुहम्मद नासिर साहब, श्री हाफ़िज़ मुहम्मद इमरान साहब, श्री माहिर आलम साहब, श्री हाफ़िज़ मुहम्मद मे राज साहब, श्री हाफ़िज़ अब्दुल रज्जाक साहब, फैय्याज आलम साहब और कई अन्य नाम जो यहां सूचीबद्ध करने के लिए बहुत अधिक हैं। यह मुश्किल है, सभी ने जान-माल से हमारा साथ दिया और सभी सेवाएं अच्छे से निभाईं। दारुल सलाम वेलफेयर ट्रस्ट इन सभी सज्जनों का हृदय से धन्यवाद करता है।

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