चंडीगढ़, 31 जनवरी। पंजाब और हरियाणा-2 के शंभू और खनुरी बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन को 13 फरवरी को एक साल पूरा होने जा रहा है। ऐसे में दोनों मोर्चों पर किसानों की संख्या बढ़ाई जा रही है। साथ ही 11 से 13 फरवरी तक होने वाली तीन किसान महापंचायतों को सफल बनाने की रणनीति पर भी किसान नेता पूरी तरह से जुटे हुए हैं।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का आमरण अनशन आज (शुक्रवार) 66वें दिन में प्रवेश कर गया है। हालांकि अनशन के कारण डल्लेवाल का शरीर कमजोर हो गया है। इसके कारण उन्हें बुखार हो गया है और वह जरा सी भी हरकत बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है।
तीन प्वाइंट से समझें किसानों की अगली रणनीति
1. केंद्र सरकार ने 14 फरवरी को चंडीगढ़ में किसानों के साथ बैठक करने का फैसला किया है। इससे पहले किसान बड़ी संख्या में बॉर्डर पर इकट्ठा होकर यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि भले ही यह आंदोलन एक साल से चल रहा है, लेकिन उनके हौंसले अभी भी बुलंद हैं। साथ ही वह लंबी लड़ाई लड़ने के लिए भी तैयार हैं।
2. दूसरी बात ये है कि किसान बिल्कुल भी आक्रामकता नहीं दिखा रहे हैं। वे बेहद शांतिपूर्ण तरीके से मोर्चे पर डटे हुए हैं। इसके साथ ही डल्लेवाल का जिस तरह से आमरण अनशन चल रहा है। इसने सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया है। डल्लेवाल ने खुद लोगों को इस आंदोलन से जुड़ने का संदेश दिया है। साथ ही वह यह आंदोलन पंजाब के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए लड़ रहे हैं।
3. किसानों का फोकस इस आंदोलन को पंजाब से बाहर ले जाना है। ऐसे में अब फोकस हरियाणा और राजस्थान पर है। इसी प्लानिंग के तहत पहले हरियाणा से किसानों के जत्थे लगातार खनुड़ी पहुंच रहे थे। इसके साथ ही अब महापंचायत और ट्रैक्टर मार्च भी इसका हिस्सा हैं क्योंकि जैसे ही दूसरे राज्यों के किसान भी इसमें शामिल हो सकेंगे। उसके बाद सरकार पर दबाव बनेगा।



