Saturday, September 26, 2026
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कलेक्टर के भागीरथी प्रयास बदलेंगे जिले के आंवला किसानों की तकदीर

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स्थापना के करीब 3 दशक बाद डाबर इंडिया फैक्ट्री प्रबंधन ने कटनी जिले से आंवला संग्रहण को दी हरी झंडी

जिले आंवला की पैदावार को प्रोत्साहित करने निरंतर प्रयत्नशील हैं कलेक्टर

कटनी। जिले के किसान सक्षम बने…इस मूलभावना को लेकर कलेक्टर कटनी एक के बाद एक निरंतर प्रयास कर रहे हैं। उनकी हर समस्याओं का जहां जड़ से हल किया जा रहा है तो वहीं उनके लिए आमदनी के नए विकल्प भी तैयार किए जा रहे हैं। वर्षों से किसानों की विकास की राह में रोड़ा बनी समस्याओं को कलेक्टर श्री प्रसाद द्वारा हर संभव स्तर पर दूर करने की कोशिश की गई है।
आंवले की खेती के लिए किया प्रोत्साहित, 1800 हे. में होने लगी खेती
पहली बार जिले में देखने मिल रहा है कि किसानों को उनकी आमदनी बढ़ाने और उनकी मेहनत का हक दिलाने किसी अधिकारी द्वारा इतनी अधिक रुचि दिखाई गई हो। कटनी की जलवायु को आंवले की खेती के लिए उपयुक्त पाते हुए कलेक्टर अवि प्रसाद ने ग्रामीण अंचलों के भ्रमण दौरान यहां के किसानों से चर्चा की और यहां के किसानों को आंवले की खेती के लिए न सिर्फ प्रोत्साहित किया बल्कि शासन प्रशासन स्तर पर हर संभव सहायता और मार्गदर्शन भी प्रदान किया। ये उन्हीं के प्रयासों का नतीजा है की कटनी में अब तक मृत प्राय पड़ी आंवले की खेती को जीवनदान मिला और बड़ी संख्या में किसानों ने आंवले की पैदावार शुरू की। ग्राम घुघरा में ग्राम पंचायत की मदद से आंवले की नर्सरी विकसित कराई गई जिसमें वर्तमान में 3 हजार से अधिक आंवले के वृक्ष विकसित हो रहे हैं। इस नर्सरी का निरीक्षण भी विगत माह कलेक्टर श्री प्रसाद द्वारा किया गया और इन पौधों की देखभाल करने वाले किसान रामकृपाल केवट की सराहना भी उन्होंने की। इसके अलावा जिले में बड़ी संख्या में किसानों ने निजी स्तर पर आंवले की खेती को अपनाया। वर्तमान में उद्यानिकी विभाग, मनरेगा, आजीविका मिशन, स्वसहायता समूहों और निजी स्तर पर किसानों द्वारा करीब 1800 हेक्टेयर में आंवले की खेती की जा रही है।
वर्षों से बनी आंवला खरीदी की समस्या पहली बार होने जा रही हल
गांवों में भ्रमण के दौरान और आंवले की खेती के लिए किसानों को प्रेरित करने के दौरान कलेक्टर श्री प्रसाद के सामने एक समस्या आई। किसानों ने बताया कि वे वर्षो से इस खेती को कर रहे थे लेकिन उनकी पैदावार को खरीददार न मिलने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और इसी वजह से आंवले की खेती धीरे धीरे कम होती जा रही है। कलेक्टर श्री प्रसाद ने उनकी समस्या को गंभीरता से सुना और उसके हल के लिए किसानों को आश्वस्त भी किया। किसानों की इन्हीं समस्याओं को लेकर कलेक्टर श्री प्रसाद ने उद्यानिकी विभाग की बैठक ली और किसानों को आंवले की खेती में हर संभव मदद प्रदान करने सहित इनकी पैदावार की खरीदी की समस्या को हल करने रणनीति बनाई गई और संवेदनशील और दूरदर्शी कलेक्टर श्री प्रसाद ने वर्षों की इस समस्या का हल भी निकाल लिया। बैठक में डाबर फैक्ट्री प्रबंधन से आंवला खरीदी के संबंध में चर्चा की गई।
डाबर फैक्ट्री को लिखा पत्र, प्रबंधन ने दी सहमति
आंवले की खेती को मुनाफे की खेती में तब्दील करने और किसानों को सक्षम बनाने के लिए प्रयत्नशील कलेक्टर श्री प्रसाद ने ग्राम पहुआ में स्थित डाबर फैक्ट्री प्रबंधन को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने कहा कि कटनी जिले में वर्तमान में विभिन्न माध्यमों से करीब 1800 हेक्टयर क्षेत्र में आंवले की खेती हो रही है, किंतु स्थानीय डाबर इंडस्ट्रीज के लिए जिले के आंवला संग्रहण न किए जाने से आंवला क्षेत्र विस्तार में विपणन की समस्या हो रही है। जिसके हल लिए स्थानीय आंवला खरीदी हेतु सहमति प्रदान किए जाने और समुचित कार्यवाही करने कलेक्टर श्री प्रसाद द्वारा डाबर फैक्ट्री प्रबंधन से कहा गया। कलेक्टर श्री प्रसाद द्वारा 9 जून को प्रेषित पत्र के जवाब में डाबर इंडस्ट्रीज लिमिटेड के स्थानीय प्रबंधन द्वारा वरिष्ठ कार्यालय से अनुमोदन प्राप्त कर 12 जून को कलेक्टर श्री प्रसाद को पत्र लिखकर अपनी सहमति प्रदान कर दी।
3 दशक से अनदेखी थी यह समस्या
उल्लेखनीय है कि कटनी जिले के ग्राम पडुआ में वर्ष 1995 में डाबर इंडिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा फैक्ट्री की स्थापना की गई। जहां आंवले की प्रोसेसिंग कर च्यवनप्राश बनाया जाता है। प्रतिवर्ष अक्टूबर से लेकर फरवरी माह के मध्य डाबर प्रबंधन द्वारा आंवले की खरीदी की जाती है। जानकारी के अनुसार करीब 350 टन प्रतिमाह हरा आंवला डाबर प्रबंधन द्वारा खरीदा जाता है। लेकिन बड़े ही दुर्भाग्य का विषय था कि कटनी जिले में करीब 28 वर्षों से फैक्ट्री स्थापित होने के बाद भी स्थानीय किसानों की आंवला पैदावार की खरीदी डाबर प्रबंधन द्वारा नहीं की गई और न ही इसको लेकर जिले में कोई प्रयास हुए। पहली बार कलेक्टर श्री प्रसाद के प्रयास से डाबर प्रबंधन द्वारा स्थानीय आंवला संग्रहण को लेकर सहमति बनी है और डाबर प्रबंधन ने कलेक्टर श्री प्रसाद के इस प्रयास पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जिला प्रशासन आंवला संग्रहण हेतु अपनी ओर से एक व्यक्ति और प्वाइंट निर्धारित कर दें जिससे प्रबंधन का खरीदी विभाग आगामी कार्यवाही हेतु संपर्क में रहे। वर्षों बाद जिले के आंवला किसानों के लिए वरदान साबित हुए कलेक्टर के इन प्रयासों से किसानों में बेतहाशा खुशी देखी जा रही है।

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