सुल्तानपुर लोधी, 14 जनवरी | श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की प्रकाश पर्व और माघी के पवित्र दिन को समर्पित नगर कीर्तन निर्मल कुटिया सीचेवाल से शुरू हुआ और सात गांवों की परिक्रमा करते हुए शाम को सीचेवाल में समाप्त हुआ। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की छत्रछाया और पांच प्यारों की अगुवाई में यह नगर कीर्तन विभिन्न गांवों से होकर गुजरा। इस दौरान राज्यसभा सदस्य एवं पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने गुरबाणी की कथा सुनाकर संगत को निहाल किया। यह नगर कीर्तन निर्मल कुटिया सीचेवाल से शुरू होकर गांव चक चेला, निहालुवाल, मुरीदवाल, कासुवाल, रुपाईवाल, अड्डा रुपाईवाल, महमुवाल से मालूपुर होते हुए निर्मल कुटिया में समाप्त हुआ। नगर कीर्तन में श्रद्धालुओं को पौधे का प्रसाद बांटने की अपनी परंपरा को कायम रखते हुए संत सीचेवाल ने माघी के इस नगर कीर्तन में भी बड़े पैमाने पर पौधे बांटे।
संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जलवायु में हो रहे बदलाव का सीधा असर पंजाब पर पड़ने लगा है। उन्होंने एक रिपोर्ट के हवाले से कहा कि पंजाब के 8 जिले जलवायु परिवर्तन के प्रभाव में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा और पानी का ध्यान नहीं रखा तो पंजाब की धरती पर बड़ा संकट पैदा हो जाएगा। संत सीचेवाल ने कहा कि कुछ दिन पहले पेट्रोल पंपों पर दो घंटे में तेल खत्म हो गया था और तब देश में डर का माहौल था। उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2039 में धरती के नीचे पानी एक हजार फीट तक गहरा तक चला जायेगा तो खेती कैसे होगी और हम कैसे रहेंगे, हम इसके बारे में न तो सोच रहे हैं और न ही हमें इसकी चिंता है। उन्होंने कहा कि तेल के बिना तो जीवन जीया जा सकता है लेकिन पानी नहीं होगा तो क्या होगा। उन्होंने कहा कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसा पंजाब छोड़कर जा रहे हैं यह एक बड़ी चुनौती है।
संत सीचेवाल ने पंजाब के लोगों से अपील की कि वे पानी का संयम से उपयोग करें और फसलों में उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से बचें। इस मौके पर गतका खिलाड़ियों ने नगर कीर्तन के आगे आगे लगातार अपनी प्रतिभा दिखाई। नगर कीर्तन में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं के लिए गांवों में लंगर की विशेष व्यवस्था की गई थी। कीर्तन के दौरान संत अवतार सिंह मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सीचेवाल के बच्चों ने भी रसभिन्न कीर्तन किया। निर्मल कुटिया सीचेवाल की उपस्थिति में रागी तेजिंदर सिंह सरपंच के जत्थे ने संगत को कीर्तन के साथ साथ माघी की कथा सुनाई।
इस मौके पर संत सुखजीत सिंह, संत गुरमेज सिंह जी, सुरजीत सिंह शंटी, सरपंच जोगा सिंह, बूटा सिंह, अमरीक सिंह संधू और अन्य इलाकों के पंच-सरपंच मौजूद थे।




