चंडीगढ़, 5 दिसंबर | ब्रिटेन ने अपने वीजा नियमों में बदलाव किया है। हालांकि इसका असर सभी देशों पर पड़ेगा, लेकिन भारत, जहां से बड़े पैमाने पर लोग शिक्षा, नौकरी और स्वास्थ्य क्षेत्र में काम के लिए ब्रिटेन जाते हैं, काफी प्रभावित हो सकता है। ब्रिटेन में नए नियम अगले साल 2024 से लागू होंगे।
ब्रिटेन सरकार के इस फैसले की भारत में खास तौर पर चर्चा है। ब्रिटेन आने वाले लोगों की संख्या कम करने के लिए ऋषि सुनक की सरकार ने कुछ कड़े कदम उठाए हैं। इसमें सबसे खास बात यह है कि अब ब्रिटेन आने वाले व्यक्ति को अपने परिवार के सदस्यों को वहां ले जाने की इजाजत नहीं होगी। इस पर रोक लगाने के साथ ही सरकार ने कुशल नौकरियों के लिए अधिकतम वेतन भी तय कर दिया है।
ब्रिटेन में जो नए नियम बदले हैं वे अगले साल 2024 से लागू होंगे। ब्रिटिश सरकार ने नए आव्रजन नियमों के बारे में कहा है कि इससे हर साल ब्रिटेन आने वाले लोगों की संख्या में कमी आएगी। फैसले की घोषणा करते हुए गृह सचिव जेम्स क्लेवरली ने कहा कि ब्रिटेन आधिकारिक आव्रजन को कम करने के लिए कड़ी कार्रवाई कर रहा है। ऋषि सुनक की सरकार पहले से ही आप्रवासन को कम करने के लिए अतिरिक्त दबाव में थी। ब्रिटेन के इस फैसले की कई हलकों में आलोचना भी हो रही है। कहा जा रहा है कि इससे ब्रिटेन आने वाले कुशल लोगों की संख्या में कमी आएगी।
पिछले सप्ताह जारी एक रिपोर्ट से पता चला है कि ब्रिटेन आने वाले कुशल श्रमिकों में भारतीयों का दबदबा है। इन कामगारों के अलावा मेडिकल क्षेत्र में काम करने वाले कई छात्र पिछले साल बड़े पैमाने पर ब्रिटेन आए हैं। का वीजा ले लिया था पिछले साल विभिन्न श्रेणियों में ब्रिटेन के लिए वीजा के लिए आवेदन करने वालों में भारतीय शीर्ष पर थे। छात्र वीज़ा श्रेणी में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक थी। भारतीय छात्र ज्यादातर नए स्नातकोत्तर वीजा मार्ग के जरिए ब्रिटेन जा रहे हैं। पिछले साल इस योजना के तहत दिए गए अनुदान का लगभग 43 प्रतिशत भारतीयों ने लिया था।



