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बड़ी खबर : आम आदमी Clinic में फर्जी एंट्री डाल Medical अफसर और महिला क्लीनिकल असिस्टेंट सरकार को लगा रहे थे चूना, हुए बर्खास्त

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जालंधर, 28 फरवरी। नकोदर के शेरपुर मोहल्ले के आम आदमी क्लीनिक जिसका नाम बदलकर बदलकर आयुष्मान आरोग्य केंद्र रख दिया गया था, में तैनात मैडीकल ऑफिसर एवं महिला क्लीनिकल असिस्टेंट को बर्खास्त करने का मामला सामने आया है। दोनों पैसों के लालच में रोगियों की फर्जी एंट्री डाल रहे थे। जांच के बाद उन पर विभाग ने कार्रवाई करते उन्हें बर्खास्त किया है।

जालंधर के सिविल सर्जन डॉ. गुरमीत लाल ने जानकारी देते हुए बताया कि नकोदर के शेरपुर मोहल्ले में स्थित एक सरकारी क्लीनिक में मार्च 2024 से मोहल्ला क्लिनिक बनने के समय से ही तैनात मेडिकल ऑफिसर और महिला क्लिनिकल असिस्टेंट द्वारा तकरीबन हर रोज 150 के करीब रोगियों की एंट्री डाली जा रही थी।

जब निज़ी एजेंसी ने मरीजों को कॉल कर फीड लिया तो पता चला कई एंट्रियां बोगस डाली गई हैं। जब विभाग के उच्च अधिकारियों ने क्लीनिक में जाकर जांच की तो पता चला कि मैडीकल ऑफिसर तथा महिला क्लीनिकल असिस्टेंट ने जितने रोगियों की एंट्री डाली है, उससे कम रोगियों की एंट्री फार्मासिस्ट की टेबलेट में है।

उन्होंने कहा कि क्लीनिक में जब भी कोई रोगी दवाई लेने आता है तो सबसे पहले क्लीनिकल अस्सिटेंट द्वारा टेबलेट में उसके मोबाइल नंबर सहित उसकी एंट्री करता है और फिर उसके बाद जब रोगी मैडीकल ऑफिसर के पास जांच करवाने के लिए पहुंचता है तो वह भी टेबलेट में उसकी एंट्री देखकर टेबलेट में ही दवाई लिख देता है। उसके बाद रोगी जब वहां बैठे फार्मासिस्ट के पास दवाई लेने जाता है तो फार्मासिस्ट उसे दवाई देने के बाद ओके कर देता है।

डॉ. गुरमीत लाल ने कहा कि क्लीनिक में मैडीकल ऑफिसर एवं क्लीनिकल असिस्टेंट के टेबलेट में तो ज्यादा बोगस रोगियों की एंट्री होती थी, जबकि फार्मासिस्ट के पास काफी कम संख्या में रोगी दवाई लेने पहुंचते थे। जांच कर रहे अधिकारियों ने जब लोगों को फोन करके पूछा कि क्या वह उक्त क्लीनिक में दवाई लेने आए थे तो कई रोगियों ने कहा कि वह तो कभी आम आदमी क्लिनिक आए ही नहीं।

डॉ. गुरमीत लाल ने कहा की क्लीनिक में नौकरी करने वाले हर मेडिकल ऑफिसर को 50 रुपए प्रति रोगी के हिसाब से सरकार पैसे दे रही है और प्रतिदिन की कम से कम राशि 2500 रुपए रखी गई है। अगर कोई मैडीकल ऑफिसर 50 से अधिक रोगियों की जांच करता है तो उस स्थिति में उसे 50 रुपए प्रति रोगी के हिसाब से ही राशि मिलती है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को पहले नोटिस जारी किए गए और फिर 20 फरवरी को बर्खास्त कर दिया गया।

डॉ. गुरमीत लाल ने कहा कि सिर्फ इसी क्लिनिक से शिकायत मिली थी जिसके बाद कार्रवाई करते हुए यह बड़ा एक्शन लिया गया है।

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