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पंजाब में ड्राइविंग टेस्ट नियमों में बड़ा बदलाव-एजैंटों पर शिकंजा कसने की तैयारी

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जालंधर,14 जून। पंजाब सरकार ने ड्राइविंग लाइसैंस बनवाने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और एजैंट-रहित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रांसपोर्ट विभाग के एन.आई.सी. पोर्टल में एक नई अपडेशन लागू की गई है, जिसके तहत अब कोई भी वाहन चाहे वह दोपहिया हो या चारपहिया, एक ही दिन में केवल एक बार ड्राइविंग टैस्ट के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा।

यह महत्वपूर्ण बदलाव राज्यभर के ऑटोमेटेड ड्राइविंग टैस्ट सैंटरों में लागू किया गया है। इस नियम के लागू होते ही अब यह संभव नहीं होगा कि एक ही वाहन का कई बार इस्तेमाल करके अलग-अलग आवेदकों को टैस्ट दिलवाया जाए। इस नए नियम के तहत यदि कोई आवेदक अपने ड्राइविंग टैस्ट के लिए किसी विशेष वाहन का उपयोग करता है तो वही वाहन उस दिन किसी अन्य आवेदक के ड्राइविंग टैस्ट के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। सिस्टम उस दूसरे ट्रैक टैस्ट को ऑटोमेटिक रिजैक्ट कर देगा।

यह व्यवस्था दोपहिया और चार-पहिया दोनों श्रेणियों के वाहनों पर समान रूप से लागू होगी। इसका उद्देश्य लाइसैंस प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, फर्जीवाड़ा रोकना और असली आवेदकों को प्राथमिकता देना है।

इस बदलाव की प्रमुख वजह फर्जीवाड़े की बढ़ती शिकायतें रही हैं। ऑटोमेटिड ड्राइविंग टैस्ट सैंटरों के बाहर एजैंटों की सक्रियता लगातार प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी। इन एजैंटों के पास खुद के वाहन होते थे, जिन्हें वे पैसे लेकर उन आवेदकों को उपलब्ध कराते थे, जिनके पास खुद का वाहन नहीं था। ऐसे में एक ही वाहन का दिन में कई बार अलग-अलग लोगों द्वारा इस्तेमाल होता था, जिससे न केवल सिस्टम की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगता था बल्कि आवेदकों से भी मोटी रकम ऐंठी जाती रही है। इस नई प्रणाली के तहत अब प्रत्येक वाहन का एक यूनिक उपयोग रिकॉर्ड होगा और एक बार ट्रैक पर उपयोग हो जाने के बाद उसी दिन उसका दोबारा प्रयोग नहीं हो सकेगा।

इस संबंध में ए.आर.टी.ओ. विशाल गोयल ने जानकारी देते हुए बताया कि नई प्रणाली से एजैंटों की अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से ऑटोमेटिड टैस्ट सैंटर में पहले ही एजेंटों पर सख्त कार्रवाई की जा रही थी, लेकिन कुछ एजेंट पार्किंग एरिया और सेंटर के बाहर रहकर भी अपना “कारोबार” जारी रखे हुए है। विशाल गोयल ने बताया कि यह स्थिति सिर्फ जालंधर में ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में देखी जा रही थी। इसीलिए सरकार ने यह कठोर कदम उठाया है ताकि एजैंटों की दलाली को पूरी तरह खत्म किया जा सके। अब एक ही वाहन के जरिए दिन में बार-बार टेस्ट करवाना नामुमकिन हो जाएगा, जिससे एजैंटों का धंधा स्वतः बंद हो जाएगा।

इस नई व्यवस्था को केवल जालंधर में ही नहीं, बल्कि पंजाब राज्य के सभी ऑटोमेटिड ड्राइविंग टैस्ट सैंटरों में एक साथ लागू किया गया है। इससे पूरे प्रदेश में एक समान प्रणाली के तहत ड्राइविंग टैस्ट होंगे, जिससे एजैंटों के नैटवर्क को तोड़ने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट विभाग अब और अधिक तकनीकी अपडेशन की ओर अग्रसर है, जिसमें फेस रिकग्निशन, लाइव कैमरा ट्रैकिंग और ई-रिपोर्टिंग जैसे कदम भी शामिल किए जा सकते हैं।

जनता को इससे आखिर क्या होगा लाभ?

– धोखाधड़ी पर रोक: अब फर्जीवाड़ा नहीं चलेगा, हर व्यक्ति को अपना वाहन खुद लाना होगा या परिचित से व्यवस्था करनी होगी।
– एजैंटों से मुक्ति: लोगों को दलालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी।
– निष्पक्ष प्रक्रिया: एक ही वाहन से बार-बार टैस्ट नहीं देने की वजह से ईमानदार आवेदकों को बराबरी का अवसर मिलेगा।
– प्रशासन की निगरानी मजबूत: ट्रैक पर हर वाहन के उपयोग का डाटा सिस्टम में रिकॉर्ड रहेगा, जिससे गलत गतिविधियों की पहचान आसान होगी।

ए.आर.टी.ओ. विशाल गोयल ने बताया कि ड्राइविंग लाइसैंस प्रक्रिया के साथ-साथ सड़क सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर भी विभाग नजर बनाए हुए है। उन्होंने जानकारी दी कि आज फिल्लौर के पास एक विशेष नाकाबंदी अभियान चलाया गया, जिसमें ओवरलोडिंग, बिना आरसी, बिना इंश्योरेंस, बिना वैध परमिट और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में कुल 10 ट्रकों, टिप्परों और अन्य कमर्शियल वाहनों का चालान किए गए हैं।  इन वाहनों के चालकों और मालिकों से कुल 3.50 लाख रुपए का जुर्माना वसूला गया। विशाल गोयल ने चेतावनी देते हुए कहा कि सड़क पर चलने वाले सभी वाणिज्यिक और निजी वाहनों को नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, अन्यथा कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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