सुल्तानपुर लोधी (डा सुनील धीर)। बोले सो निहाल की जयकारों में गाँव गट्टा मुंडी कासू के पास सतलुज नदी के धुसी बांध में आई दरार 18 दिन बाद भर गई है। पंजाब के लोगों ने इस बांध को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की। यह गैप 925 फीट से भी ज्यादा चौड़ा था। सतलुज के इस धूसी बांध के टूटने से इलाके में भारी तबाही हुई। 10 और 11 जुलाई की दरमियानी रात को सतलुज नदी का धूसी तटबंध दो स्थानों पर टूट गया था। पहले करीब 350 फीट का गैप पांच दिन में भर गया था।
दूसरा गैप गट्टा मुडी कासु के पास था जो आज रात करीब 7:30 बजे भर गया। देर रात तटबंध पूरा होने पर राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पंजाब के लोगों का धन्यवाद किया जो लगातार विभिन्न जिलों से मिट्टी की ट्रॉलियां ला रहे थे। उन्होंने कहा कि लोगों की भागीदारी से ही सतलुज के दोनों बांध पूरे हुए। उन्होंने कहा कि जन कल्याण के कार्य सभी के साझा कार्य हैं और इसमें सभी के सहयोग की आवश्यकता है। बांध के पूरा होने के बाद इस बांध की मजबूती का काम शुरू किया जाएगा। जिसके लिएअभी भी मिट्टी और डीजल की जरूरत है।
गौरतलब है कि सतलुज में पानी बढ़ने से बाढ़ प्रभावित इलाके के लोग चिंतित हैं। इस क्षेत्र में अभी भी 7 गांवों का सड़क संपर्क टूटा हुआ है। खेतों में तीन से चार फीट तक पानी जमा रहने से लोगों को चिंता सता रही है कि अगर कुछ दिनों तक पानी नहीं निकला तो अगली फसल लगाना उनके लिए मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने बांध बांधते समय पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। आज भी पंजाब भर में लोग लगातार मिट्टी की ट्रॉलियां भरकर ला रहे हैं।
ड्रेनेज विभाग के मुताबिक इस गैप की अधिकतम गहराई 50 फीट तक थी, जिसके कारण मिट्टी भारी मात्रा में गिर रही थी। ड्रेनेज विभाग के मुताबिक इस गैप को भरने की अनुमानित लागत करीब 5 करोड़ रुपये तय की गई थी। जल निकासी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने दावा किया था कि 100 दिन से पहले 925 फीट का गैप पूरी तरह से असंभव है। लेकिन विभाग के यह दावे लोक शक्ति आगे फेल हो गए।
18 जुलाई को गट्टा मुंडी कासू वाला पार में जब बांध बनाने की अरदास की गई तो उस समय कैबिनेट मंत्री बलकार सिंह, नकोदर हलके की विधायक बीबी इंद्रजीत कौर मान, डिप्टी कमिश्नर विशेष सारंगल भी मौजूद थे। उस दिन यह निर्णय लिया गया कि तटबंध का एक किनारा राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल के नेतृत्व में बनाया जाएगा और दूसरा किनारा ड्रेनेज विभाग द्वारा बनाया जाएगा। पूरे पंजाब से आए श्रद्धालुओं के शारीरिक श्रम और मिट्टी से भरी लगातार ट्रॉलियों ने 18 दिनों में लगभग 925 फीट का बांध बना दिया है।



