बच्चों के व्यवहार की नींव उनके शुरूआती स्कूली दिनों से ही पडऩे लगती है
जालंधर। कुछ सामाजिक मुद्दे ऐसे होते हैं कि समय रहते अगर हमने उन पर ध्यान नहीं दिया या अपनी गफलत ओैर सुस्ती के कारन समाज को उस के नुक्सानात से अवगत नहीं कराया तो उस का ख़मियाज़ा सिर्फ हम नहीं बल्कि कई नसलों तक को भुगतना पड़ता है। यह विचार वरिष्ठ जर्नलिस्ट श्री कृष्ण भनोट ने पंजाब टाइमज़ न्यूज़ के संवाददाता से बातचीत करते हुए वयक्त किये।
उन्होने कहा कि बच्चे देश तथा समाज का भविष्य होते हैं। वे जो कुछ भी देखते तथा सुनते हैं वहीं उनके कोमल मन पर अंकित हो जाता है। जो भविष्य में उनके क्रियाकलापों की नींव बनता है। बच्चों के व्यवहार की नींव उनके शुरूआती स्कूली दिनों से ही पडऩे लगती है। बहुत से बच्चे स्कूली बसों से ही अपनी पाठशाला जाते हैं। आजकल देखने में आ रहा है कि स्कूल पहुंचने की जल्दी में स्कूली बसों के ड्राइवर यातायात के नियमों का उल्लंघन करने लगे हैं। कभी निर्धारित से तेज रफ्तार, कभी ट्रैफिक सिगनल को तोडऩा तो कभी चौराहे पर पूरा घूमकर मुडऩे की बजाय शार्टकट लेना।
यदि बच्चे यही सब कुछ देखेंगे तो जब खुद सड़क पर निकलेंगे तो वह भी ऐसे नियमों का उल्लंघन तो करेंगे ही। इसलिए स्कूल तथा नगर प्रशासनों को चाहिए कि स्कूली बसों को लेकर नियमों का कड़ाई से पालन करवाया जाए। नियमों का उल्लंघन करने वाली स्कूली बसों तथा उनके स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य की पीढ़ी में अच्छे संस्कार पनपें और वह नियमों को लेकर सतर्क रहे।




