धार्मिक कामों से पहले पड़ौसियों और संबधियों की करें आर्थिक मदद
लुधियाना। पवित्र रमज़ान शरीफ के तीसरे जुम्मे की नमाज़ अदा करने से पहले मुस्लमानों को संबोधित करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना मुहम्मद उसमान रहमानी लुधियानवी ने कहा कि रमज़ान शरीफ बंदे का अपने रब्ब से इज़हार-ए- इश्क का महीना है। बंदा अपने रब्ब को राजी करने के लिए उसके हुक्म के मुताबिक अपना वक्त गुजारता है।
शाही इमाम ने कहा कि अल्लाह ताआला हमारी नीयतों को जानता है। उसे पता है कि कौन दिखावे का भूखा प्यासा है और कौन सच्चा रोज़ेदार है। मौलाना ने कहा कि अल्लाह के प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहीवसल्लम रमज़ान शरीफ के पवित्र महीने में तेज़ चलने वाली हवा से भी ज्यादा फइयाका (दानी) थे।
शाही इमाम ने कहा कि रमज़ान शरीफ में हमें चाहिए कि धार्मिक कामों से भी पहले आर्थिक रूप से कमज़ोर अपने पड़ौसियों व रिश्तेदारों की मदद करें। उन्होनें कहा कि पड़ौसी चाहे किसी भी धर्म से सबंध रखता हो, अगर वह भूखा है तो मुस्लमान पर उसकी मदद करना फर्ज है।
उन्होनें कहा कि अल्लाह ताआला अपने उन बंदों से बहुत प्यार करता है जो कि उसके बंदों की मदद करते है। शाही इमाम ने कहा कि इबादत से जन्नत मिलती है लेकिन खिदमत से खुदा मिलता है। इसलिए अगर हम चाहते है कि खुदा के दोस्त बन जाए तो बिना भेद-भाव के कमज़ोर इंसानों की मदद करें।
शाही इमाम मौलाना उसमान ने कहा कि रमज़ान का ये पवित्र महीना हमें इसी तरह प्यार, मोहब्बत और आपसी भाईचारे को बढ़ाने की प्रेरणा देता है।



