मुंशी प्रेम चंद उर्दू नसरी साहित्य के शहनशाह, अवाम के जज़्बात – ख्यालात को नाविलों मे बतोर किरदार किया पेशः मोैलाना अनवर अमृतसरी
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ओैर पंडित जवाहर लाल नेहरू भी थे प्रेम चंद की शख्सियत से प्रभावितः सामिया आफरीन
जालंधर। पंजाब के ज़िला जालंधर में स्थित दूरदर्शन में उर्दू नसर एवं अदब के शहनशाह मुंशी प्रेम चंद जी के जीवन,साहित्यक कारनामों के विषय पर एक प्रोग्राम आयोजित किया गया। जिस की अध्यक्षता दूरदर्शन जालंधर के हिंदी एवं साहित्य प्रोग्रामों की प्रोड्यूसर श्रीमति सुशमा गुप्ता जी ने की। इस समागम में नैशनल ह्यूमन राईटस सोशल जस्टिस फरंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष,वरिष्ठ पत्रकार,नोैजवान आलिम ए दीन मोैलाना अनवर अमृतसरी एवं पंजाबी यूनीवर्सिटी पटियाला के उर्दू विभाग की सहायक प्रोफैसर सामिया आफरीन ने हिस्सा लिया।
इस अवसर पर श्री अनवर अमृतसरी ने मुंशी प्रेम चंद जी की अदबी ज़िंदगी, उनके द्वारा लिखे गये अफसानों,नाविलों,कहानियोँ व डरामों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होने कहा कि मुंशी प्रेम चंद उर्दू नसरी साहित्य के शहनशाह थे। वास्तव में वह हकीकत निगारी के लिहाज़ से उच्च स्तर के लिखने वालों में शामिल थे। वह उर्दू के साथ साथ हिंदी के मुहावरों- कहावतों को भी बहुत ही सादा शब्दों में प्रयोग करते थे। प्रेम चंद के विचारों में यह बात मुख्य थी कि उन की ज़िंदगी का मकसद ये था कि वह उन जज़बात ओैर ख्यालात को जो काैम के दिलों ओैर दिमागों में बसे हुए हैं उन्हें पेश करें।
प्रोग्राम के दोैरान अपने विचार वय्कत करते हुए श्रीमति सामिया आफरीन ने कहा कि मुंशी प्रेम चंद ने अपने नाविलों में कोैमी समस्योओं ओैर उन के हल, देहाती ज़िंदगी के मूल मसले, जहेज़ की लानत, बेजोड़ शादी की समस्याओं समेत कई चीज़ों का विस्तार से जिक्र किया है। प्रेम चंद एक ऐसी शख्सियत थी जिन से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ओैर पंडित जवाहर लाल नेहरू भी प्रभावित थे।



