चंडीगढ़,3 अप्रैल। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पुड्डा और गमाडा द्वारा पांच आपराधिक मामलों में सुनवाई की अनुमति देने और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में 11 साल की देरी पर हैरानी जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि पुड्डा और गमाडा के अधिकारियों ने आरोपियों के प्रभाव में आकर जांच को प्रभावित करने की हरसंभव कोशिश की है। हाईकोर्ट ने दोनों को फटकार लगाते हुए कहा कि हमारे संज्ञान में आया है कि पुड्डा और गमाडा की देरी के कारण कई आपराधिक मामलों में जांच अनावश्यक रूप से लंबित है.
फतेहगढ़ साहिब के पीयूष बंसल ने 2017 में याचिका दायर कर आईपीसी की धारा 279, 304-ए के तहत दर्ज मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या पुलिस अधीक्षक रैंक के वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने की मांग की थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि उसे आपराधिक मामले में फंसाया जा रहा है और 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है. कोर्ट ने कहा कि मामला सात साल पुराना है और अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है. ऐसे में फतेहगढ़ के एसएसपी से जवाब मांगा गया है. एसएसपी ने बताया था कि पांच ऐसे आपराधिक मामले हैं जिनकी जांच पुड्डा और गमाडा से मंजूरी न मिलने के कारण 11 साल से लंबित है।
एसएसपी द्वारा दायर हलफनामे पर गौर करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट है कि पुड्डा/गमाडा अधिकारियों ने जांच प्रक्रिया में बाधा डालने के लिए हर संभव प्रयास किया है और यह स्पष्ट है कि इन मामलों में यह आरोपियों के प्रभाव में किया गया था। है ऐसे कई मामलों में जांच में अनावश्यक देरी हुई है क्योंकि बार-बार आवेदन करने के बावजूद पुड्डा/गमाडा से रिपोर्ट/अनुमोदन प्राप्त नहीं हुआ।
यह जानकारी पुड्डा और गमाडा से मांगी गई है
1. पुलिस से रिपोर्ट/अनुमोदन के लिए आवेदन प्राप्त होने की तारीख, एफआईआर नंबर, अनुभाग, पुलिस स्टेशन और एफआईआर का विवरण।
2. आवेदन प्राप्त करने वाले अधिकारी का नाम
3. उन फाइलों को देखने वाले अधिकारी का नाम
4. ऐसे प्रत्येक मामले में रिपोर्ट या अनुमोदन की तारीख
5. पुलिस रिकॉर्ड या क्लीयरेंस देने में देरी का कारण
6. प्रत्येक मामले में रिपोर्ट/अनुमोदन में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई



