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ज़कात के सामूहिक प्रबंध से समाज की गरीबी दूर की जा सकती है: मौलाना ताहिर मदनी

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लखनऊ, 8 मार्च | इस्लाम में ज़कात की व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह है कि हम मानवता के लिए कार्य करें। समाज में सभी लोग एक समान नहीं हैं, अल्लाह कुछ को नवाज़ता है और कुछ गरीबी से दोचार होते हैं। ज़कात की व्यवस्था सभी लोगों की ज़रूरतों को पूरा करता है, इसलिए इस्लाम ने ज़कात की व्यवस्था को सामूहिक बनाया है और यही इसकी वास्तविक भावना है। उक्त विचार जामियतुल फलाह के पूर्व निदेशक मौलाना मुहम्मद ताहिर मदनी ने व्यक्त किए।

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ज़कात और चैरिटेबल फाउंडेशन की ओर से “सामाजिक विकास में ज़कात की भूमिका” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसे संबोधित करते हुए मौलाना मुहम्मद ताहिर मदनी ने कहा कि ज़कात इस तरह अदा करनी चाहिए कि ज़कात लेने वाला ज़कात देने वाला बन जाए और इस्लाम के इतिहास में ऐसे भी दौर आए हैं जब ज़कात की सामूहिक व्यवस्था स्थापित हुई थी, तब ज़कात लेने वाला कोई नहीं था, हर कोई ज़कात देने वाला बन गया। यदि हम आज भी ज़कात की सामूहिक व्यवस्था को उसकी मूल भावना के साथ स्थापित कर लें तो आज भी हमारे समाज से गरीबी दूर हो सकती है और हम लेने वाले के बजाय देने वाले बन जायेंगे।

ज़कात एंड चैरिटेबल फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट पेश करते हुए डॉ. कौसर उस्मान ने कहा कि आज हमारे देश में मुसलमानों की जो स्थिति है, उससे हम सभी भली-भांति परिचित हैं। जबकि सिर्फ हमारे देश में ही सालाना 30 से 40 हज़ार करोड़ रुपए की ज़कात निकाली जाती है। अगर हम इस ज़कात को सामूहिक रूप से इकट्ठा करें और इसे खर्च करने का एक योजनाबद्ध तरीका अपनाएं तो हम जल्द ही अपने समाज में एक बड़ा बदलाव देख सकते हैं।

ज़कात और चैरिटेबल फाउंडेशन ने इस दिशा में एक छोटा सा प्रयास किया है और केवल दो वर्षों में 135571 से अधिक भोजन पैकेट वितरित किए गए, फाउंडेशन के मोबाइल क्लिनिक के माध्यम से 12169 लोगों को बुनियादी चिकित्सा सेवाएं प्रदान की गईं, 198 व्यक्तियों/परिवारों का पुनर्वास किया गया। 142 लोगों को व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता की गई। मॉडल कम्युनिटी सेंटर नामक एक प्रशिक्षण केंद्र खोला गया है जिसमें 30 लड़कियां विभिन्न कौशल सीख रही हैं। रमजान के दौरान 475 इफ्तार किट और 4800 इफ्तार पैकेट वितरित किए गए। इसके अलावा अलग-अलग समय में ज़रूरतमंदों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई।

महाराष्ट्र से आए सामाजिक कार्यकर्ता मुजतबा फारूक ने कहा कि ज़कात एंड चैरिटेबल फाउंडेशन ने अपने इस प्रयास से अन्य शहरों के लिए एक मॉडल स्थापित किया है। ऐसे प्रयास हर शहर में होने चाहिए। ज़कात के सामूहिक अनुशासन से ही उम्मत का विकास संभव है।

कार्यक्रम का संचालन नय्यर इक़बाल खान ने किया, डॉ. मलिक मुहम्मद फैसल के धन्यवाद ज्ञापन और चेयरमैन फाउंडेशन मंजूर अहमद की दुआ से कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त आफताब अहमद, ग्रेविटी कोचिंग के सीईओ अशफाक अहमद, पूर्व न्यायाधीश बीडी नकवी ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस मौके पर सिराज अहमद, तारिक सिद्दीकी, अरशद आज़मी, डॉ. हिलाल, इंजीनियर गुफरान, मुहम्मद कैस, दानिश ज़िया उस्मानी, डॉ. अमजद सईद फलाही, एडवोकेट नज्मुस्साकिब खान, एडवोकेट मुहम्मद राशिद, असद अली, अली नईम राज़ी, अताउर्रहमान नदवी आदि शामिल रहे।

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