नई दिल्ली। दुनिया भर के हेल्थ एक्सपर्ट्स ने हमेशा गर्भवती महिलाओं को शराब से दूर रहने की सलाह दी है। ऐसा इसलिए क्योंकि शराब से बच्चे को कई तरह के नुकसान होते हैं। हाल ही में नीदरलैंड के इरास्मस मेडिकल सेंटर के वैज्ञानिकों ने इस विषय पर शोध किया है। पाया गया है कि सप्ताह में सिर्फ एक गिलास वाइन पीने से बच्चे के चेहरे पर स्थायी परिवर्तन हो सकता है।
इस शोध में वैज्ञानिकों ने 5,600 स्कूली बच्चों के चेहरे की 200 विशेषताओं का अध्ययन किया। यह 3डी इमेजिंग और डीप लर्निंग एल्गोरिदम की मदद से संभव हुआ है। इनमें से कुछ बच्चों की माताओं ने गर्भावस्था के दौरान शराब का सेवन किया था, जबकि कुछ ने शराब से परहेज़ किया था। शोधकर्ताओं के मुताबिक, एक हफ्ते में सिर्फ 12 ग्राम शराब पीने से बच्चे के चेहरे पर स्थायी रूप से बादल छा सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने विश्लेषण में पाया कि गर्भावस्था के बाद थोड़ी सी शराब पीने से बच्चों के चेहरे पर कई बदलाव देखे जा सकते हैं। इनमें छोटी नाक, आंखों के नीचे अवसाद और उभरी हुई ठोड़ी शामिल हैं। एक गर्भवती महिला जितनी अधिक शराब पीती है, शिशुओं में ये परिवर्तन उतने ही गहरे होते हैं। यह विशेष रूप से उन माताओं के बच्चों के मामले में होता है जिन्होंने गर्भावस्था के दौरान और 3 महीने से पहले शराब पी थी।
गर्भावस्था के दौरान शराब के सेवन से बच्चे में फीटल अल्कोहल स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर चेहरे के साथ-साथ बच्चे के दिमाग पर भी पड़ता है। वह मानसिक रूप से कमज़ोर हो सकता है। उन्हें अपने व्यवहार से भी समस्या हो सकती है। इसीलिए गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा के लिए महिलाओं को शराब से दूर रहने को कहा जाता है।
पहले के एक अध्ययन में गर्भावस्था के दौरान बच्चे पर प्रति सप्ताह 70 ग्राम शराब के प्रभावों पर एक अध्ययन किया गया था। इसमें भी कुछ ऐसा ही नतीजा देखने को मिला। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शराब की कितनी भी मात्रा भ्रूण और बच्चे के लिए हानिकारक होती है।



