Thursday, October 1, 2026
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हाई कोर्ट का PSPCL को बड़ा आदेश: विभाग की गलती के कारण अगर करंट लगने पर मौत हुूई तो, एक महीने के अंदर देना होगा मुआवजा

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चंडीगढ़, 16 दिसंबर | पिछले कुछ दिनों से जालंधर में करंट से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ने के बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अहम आदेश दिए हैं। हाई कोर्ट ने पंजाब पावरकॉम को बिजली के करंट से किसी व्यक्ति की मौत या क्षति होने पर मुआवजा देने का आदेश दिया है।

घटना के बाद पावरकॉम को करीब 30 दिन के अंदर मुआवजा देना होगा। हालांकि कोर्ट ने कहा कि यह नियम तभी लागू होगा जब इस घटना में बिजली विभाग की लापरवाही सामने आये। इसका जिम्मा पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) को दिया गया है।

आपको बता दें कि पिछले 30 दिनों में जालंधर में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें करंट लगने से लोगों की मौत हो गई है। हालांकि पावरकॉम का कहना था कि उक्त घटना में पावरकॉम की कोई गलती नहीं है।

करंट से मौत के मुआवजे को लेकर बड़ी संख्या में याचिकाएं पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित थीं और हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और पीएसपीसीएल को मुआवजे के लिए नीति बनाने का निर्देश दिया था।

बता दें कि सरकारी वकील तेज शर्मा ने पंजाब के अधिकारियों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश की, जिसमें बहस के बाद सरकारी कर्मचारियों, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के साथ-साथ लोगों के लिए मुआवजा राशि तय करने के आदेश दिए गए।

हाई कोर्ट ने कहा कि अगर पावरकॉम या उनके कर्मचारियों की ओर से किसी भी तरह की लापरवाही पाई जाती है तो उस स्थिति में पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि, अगर बिजली विभाग की लापरवाही के कारण कोई आम व्यक्ति करंट लगने से मर जाता है या घायल हो जाता है, तो श्रमिक मुआवजा अधिनियम के तहत मुआवजा जारी किया जाएगा।

मुआवजे की रकम मृतक की उम्र और उसकी आय के हिसाब से तय की जाएगी। पावरकॉम को सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए घटना के 30 दिन के भीतर मुआवजा जारी करना होगा।

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