Thursday, April 16, 2026
No menu items!
Google search engine

अकाली दल ने 1 नवंबर को होने वाली महा डिबेट का हिस्सा बनने के लिए रखी ये शर्त

Spread the News

चंडीगढ़, 30 अक्तूबर। मुख्यमंत्री भगवंत ने 1 नवंबर को सभी पार्टियों से बहस की है। पहली नवंबर को पंजाब दिवस भी मनाया जाता है। आज ही के दिन हरियाणा और हिमाचल प्रदेश पंजाब से अलग हुए थे। यह दिन पंजाब के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है।

अब इस मुद्दे पर राजनीति गरमा गई है। शिरोमणि अकाली दल का कहना है कि वह इस बहस का हिस्सा बनने के लिए तैयार है, बशर्ते 1 नवंबर को होने वाली बहस का विषय सिर्फ पानी का मुद्दा हो। अकाली दल के वरिष्ठ नेता बलविंदर सिंह भूंदड़, प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा और डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि वे बहस से नहीं भागते लेकिन आज मुद्दा पंजाब में पानी बचाने का है। उन्होंने कहा कि अगर सभी मुद्दों पर बहस करनी है तो कोई और तारीख तय की जानी चाहिए और यह बहस 1947 से शुरू होनी चाहिए।

भूंदड़ ने कहा कि आज बहस की नहीं बल्कि मिलकर पंजाब के संकट को सुलझाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पंजाबियों ने आम आदमी पार्टी को बड़ी जिम्मेदारी दी है और परिवार के मुखिया के तौर पर मुख्यमंत्री का कर्तव्य है कि वह सभी पार्टियों को साथ लेकर चलें। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है और मिलकर इसका समाधान निकालना चाहिए। भूंदड़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अकाली दल न कभी डरा है और न कभी डरेगा।

पूर्व सांसद प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि समाज में यह धारणा है कि पानी के मुद्दे पर जहां हरियाणा की सभी राजनीतिक पार्टियां एकजुट हैं, वहीं पंजाब से राज्यसभा सदस्य और आप संयोजक अरविंदर केजरीवाल भी एकजुट हैं। हरियाणा। पूरा कर रहे हैं उन्होंने कहा कि अकाली दल किसी भी तरह का विवाद नहीं चाहता, लेकिन बहस की बजाय सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए थी ताकि साझा रणनीति बनाकर मामले को सुलझाया जा सके। उन्होंने कहा कि अगर बहस होनी ही थी तो तय नियम होने चाहिए थे कि किस पार्टी को पहले बोलना चाहिए और किसे बाद में बोलना चाहिए और पूरी बहस के सार का समाधान क्या होगा।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments