Monday, September 21, 2026
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मुंशी प्रेमचंद की पुण्य तिथि पर श्रृद्धांजलि सभा का पंजाब कायस्थ समाज द्वारा किया गया आयोजन

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लधियाना। जानकारी के अनुसार आज संस्था के आदर्श नगर चण्डीगढ़ रोड लुधियाना स्थित कार्यालय में दो कायस्थ विभूतियों लोकनायक स्व.जय प्रकाश नारायण एवं हिन्दी साहित्य जगत के सम्राट कहे जाने वाले मुंशी प्रेमचंद की पुण्य तिथि पर श्रृद्धांजलि सभा का आयोजन पंजाब कायस्थ समाज द्वारा किया गया।
कायस्थ समाज के विभिन्न संगठनों ने हिस्सा लिया जिसमें श्री चित्रांश सभा पंजाब, कायस्थ चित्रगुप्त महासभा, अखिल भारतीय कायस्थ महासभा (दिल्ली पंजि) एवं अखिल भारतीय चित्रगुप्त कायस्थ महासभा के पदाधिकारी ने श्रृद्धांजलि अर्पित किए।
सामाजिक कार्यकर्ता श्री सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने सभा को सम्बोधित करते हुए लोकनायक जयप्रकाश नारायण और मुंशी प्रेमचंद के जीवन पर प्रकाश डाला। श्री सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनेता थे एवं भ्रष्टाचार के शत्रु थे। लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जन्म 11अक्टूबर 1902 को बिहार के सारण में हुआ था। इन्हें इन्दिरा गांधी के विरुद्ध किए गए 1970 के आंदोलन से विशेष रूप से जाना जाता है। अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन में “करो या मरो” का नारा इन्हीं के द्वारा दिया गया जिससे अंग्रजों का तख्त हिल गया था। 8 अक्टूबर 1979 को इनका देहावसान हुआ।1965 में इन्हें समाज सेवा के लिए मैगेससे पुरस्कार प्रदान किया गया एवं 1998 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
हिन्दी साहित्य के महान उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 में वाराणसी के निकट लमही नामक गांव में हुआ था। इनका नाम धनपत राय था। बचपन में ही माता-पिता की मृत्यु हो जाने के कारण बचपन बहुत बहुत कष्टमय रहा। फिर भी पढ़ाई जारी रखें। इन्होंने एक दर्जन उपन्यास व 300 कहानियां लिखी।जो सभी समाज से जुड़ी रही। इनका स्वर्गवास 8 अक्टूबर 1936 को हुआ।
श्री राकेश कुमार सिन्हा ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण एक अच्छे समाज सेवक थे जो सदैव लोगों के दिलों में रहेंगे।
सज्जन श्रीवास्तव एवं प्रदीप श्रीवास्तव ने भी मुंशी प्रेमचन्द के जीवन पर प्रकाश डाला।मुंशी प्रेमचंद का साहित्य आम जनता के क्रियाकलापों से मेल खाता है।
कृपाशंकर श्रीवास्तव ने मुंशी प्रेमचंद कका जीवन परिचय देते हुए भावुक हो गए।
दिलीप श्रीवास्तव, नागेन्द्र श्रीवास्तव एवं अभिषेक श्रीवास्तव ने सभी को लोकनायक जयप्रकाश नारायण एवं मुंशी प्रेमचंद द्वारा किए सेवाओं आंदोलन एवं साहित्य साधना के बारे में जानकारी दी।
अंत मे उपस्थित सभी लोगों ने कायस्थ शिरोमणि जुझारू राष्ट्रभक्त संपूर्ण क्रांति के नायक लोकनायक जयप्रकाश नारायण एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद को श्रृद्धांजलि अर्पित की गई एवं उनके आदर्शो पर चलने का संकल्प लिया गया।

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