ना जाने कब अब उनसे कुर्बत होगी
***********
ना जाने कब अब उन से कुर्बत होगी,
उस दिन दिल की पूरी हरसत होगी।
मन मे जागी हैँ मिलने की आशाएँ,
जब हम से मिलने की फुरसत होगी।
आये ना कोई बाधा इस जीवन में,
हिय से उसदिन गायब नफरत होगी।
मरते-रहते हर दिन हम अरमानों में,
पैदा तन – मन मे कुछ हरकत होगी।
गम की काली रातें आती रहती हैं,
ख़ुशियों में आखिर यूँ बरकत होगी।
गाते रहते हम हर दम नगमें-गजलें,
मनसीरत के हक में कुदरत होगी।
खेडी राओ वाली (कैथल)



