चम्बा/ हिमाचल। यूपी के मुजफ्फरनगर का नेहा पब्लिक स्कूल आज कल विवादों में है, उस स्कूल की टीचर तृप्ता त्यागी एक हिंदू बच्चे को साथी मुस्लिम बच्चे के गाल पर थप्पड़ मारने को कहती है। क्योंकि वह मुसलमान है। बच्चे के पिता इरशाद अपने बेटे को स्कूल नहीं भेजना चाहते। रिपोर्ट भी नहीं लिखवाएंगे। शायद कानून के राज पर यकीन नहीं बचा। फिर, अपने बेटे को देश के किस स्कूल में भेजें, जहां धर्म के आधार पर विभाजनकारी सोच न हो ? यह विचार मोैलाना अजहर ने मी़डिया के सामने वयक्त किये।
उस बच्चे की विचारधारा इस देश, लोकतंत्र और गरिमा, बराबरी और धार्मिक स्वतंत्रता की बड़ी बात करने वाले संविधान के प्रति कैसी होगी, जिसकी आत्मा को सरेआम एक थप्पड़ से कुचल दिया गया हो? आप घर से बाहर निकलें। पाएंगे कि हर तीसरे दिमाग में यह ज़हर भरा है।यकीनन, ये सिर्फ एक घटना नहीं, एक विचारधारा की हार है।1857 से 1947 तक जिस एकजुटता के साथ हमने ब्रिटिश हुकूमत से जंग लड़ी, वह विचारधारा गांधी के साथ कैसे खत्म हो गई? गाल पर मजहबी नफ़रत का थप्पड़ खाते उस बच्चे का क्या भविष्य है? उसके लिए इस देश की क्या तस्वीर है? देश का क्या तसव्वुर है? सब–कुछ भूल जाना और डरकर, दुबककर, चुपचाप किसी मदरसे की आड़ लेना? मैं नहीं जानता कि प्रगतिशील विचारक इस घटना को किस तरह देखते हैं।



