Saturday, February 7, 2026
No menu items!
Google search engine

शादी-ब्याह जैसी लगभग सभी रस्मों पर इस्लामी रंग को बढ़ाने की जरूरत है

Spread the News

जमीयत उलमा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मुफ़्ती सैयद मोहम्मद अफ़्फान मनसूरपुरी का लुधियाना पंजाब में संबोधन

लुधियाना,25 नवम्बर। जमीयत उलमा ज़िला लुधियाना के ख़ाज़िन हाजी मोहम्मद फ़ुरकान ने संवाददाता से बात करते हुए कहा कि देश के प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन और मक़बूल आम ख़तीब व मुक़र्रिर मौलाना मुफ़्ती सैयद मोहम्मद अफ़्फान मनसूरपुरी, अध्यक्ष जमीयत उलमा उत्तर प्रदेश और शेख-उल-हदीस जामिया अरबिया इस्लामिया जामे मस्जिद अमरोहा की लुधियाना पंजाब तशरीफ़-आवरी के मौके पर मदीना मस्जिद गुलाबी बाग टिब्बा रोड लुधियाना में एक महत्वपूर्ण इस्लाह-ए-मुआशरा कार्यक्रम आयोजित किया गया।

जिसकी सदारत और सरपरस्ती के फ़रायज़ मुफ़्ती मोहम्मद आरिफ़ लुधियानवी, कन्वीनर जमीयत उलमा पंजाब हरियाणा हिमाचल और चंडीगढ़ तथा जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता हाजी नौशाद आलम, नायब सदर जमीयत उलमा लुधियाना पंजाब ने अदा किए। कार्यक्रम की शुरुआत मुफ़्ती मोहम्मद अनस लुधियानवी, छात्र जामिया इमाम मोहम्मद अनवर शाह देवबंद की तिलावत-ए-कुरआन और नात-ए-नबी से कारी मुजाहिदुल इस्लाम बिजनौरी, नाज़िम इस्लाह-ए-मुआशरा जमीयत उलमा लुधियाना ने की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना और मुफ़्ती सैयद मोहम्मद अफ़्फान मनसूरपुरी, अध्यक्ष जमीयत उलमा उत्तर प्रदेश ने कहा कि भाइयों के बीच रहन-सहन और मेलजोल के कारण बहुत सी गैर-शरई रस्में हमारे समाज में आ गई हैं, जिनका ख़ास तौर पर अवलोकन शादी-ब्याह के मौकों पर किया जाता है। आपने कहा कि निकाह इंसान की फ़ितरी ज़रूरत है और शरीअत ने अपने मिज़ाज के मुताबिक इस आम ज़रूरत को बहुत आसान बनाकर पेश किया है ताकि हर इंसान आसानी से इसकी तरफ़ बढ़ सके और निकाह की शक्ल में अपनी इस फ़ितरी ज़रूरत को जायज़ तरीक़े से पूरा कर सके। आपने कहा कि निकाह की महफ़िलें मस्जिदों में आयोजित की जाएँ और रिश्तेदारियाँ दीनदारी की बुनियाद पर कायम की जाएँ।

जमीयत उलमा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मुफ़्ती सैयद मोहम्मद अफ़्फान मनसूरपुरी ने दर्द भरे अंदाज़ में कहा कि हमारी शादियों पर ग़ैरों का रंग हावी हो गया है और दीन का रंग फीका पड़ गया है। मर्द-औरत का खुला मेलजोल, डीजे और नाच-गाना, सलामी, पटाखे, गैर-मह्रम और अनजान औरतों से बारात का स्वागत, दहेज के नाम पर मनमानी मांगें, मेंहदी आदि कई रस्में ऐसी की जा रही हैं जिनसे शरई हुक्मों की धज्जियाँ उड़ाई जाती हैं और अपनी झूठी प्रतिष्ठा को ऊँचा रखने के लिए अल्लाह और उसके रसूल को नाराज़ किया जाता है। आपने कहा कि शादियाँ इतनी महंगी कर दी गई हैं कि एक मध्यम और ग़रीब इंसान शादी के नाम से ही घबरा जाता है और उसकी नींद हराम हो जाती है। नतीजा यह होता है कि शादियाँ लगातार टलती जाती हैं और बदकारी जैसे दर्दनाक वाक़े पेश आते हैं। इसलिए इस स्थिति को बदलने की ज़रूरत है और शादी-ब्याह सहित सभी रस्मों पर इस्लामी रंग को हावी करने और इस्लामी छाप छोड़ने की ज़रूरत है।

मौलाना मुफ़्ती सैयद मोहम्मद अफ़्फान मनसूरपुरी ने बयान के अंत में मौलाना मोहम्मद अल्तमश लुधियानवी, जनरल सेक्रेटरी जमीयत उलमा ज़िला लुधियाना का निकाह पढ़ाया और कहा कि हाजी मोहम्मद फ़ुरकान और हाजी मोहम्मद नसीम ने निकाह के इस मौके पर शरई उसूलों का ख़ूब ख़याल रखा है और शरीअत व सुन्नत के रंग में इस पूरी रस्म को ढालने की पूरी कोशिश की है। आज के माहौल में इन हजरात का यह जज़्बा क़ाबिले-क़दर है और हमारे लिए तथा समाज के हर व्यक्ति के लिए एक मिसाल और नमूना है।

करीब दस बजे मेहमान-ए-ख़ास की दुआ पर यह कार्यक्रम समाप्त हुआ और इसमें शामिल मेहमानों में हाजी मोहम्मद कमाल, अमीर जमात लुधियाना, मुफ़्ती अब्दुल्लाह शक्ति नगर, मुफ़्ती अफ़सर गुलाबी बाग, नज़ाकत अहमद, लियाक़त अहमद, मोहम्मद उस्मान, हाजी हनीफ़, हाफ़िज़ मोहम्मद नाज़िम, मोहतमिम मदरसा अरबिया तर्ती़लुल कुरआन मयापुरी, मुफ़्ती मोहम्मद साकिब क़ासमी, मोहतमिम मदरसा उमर फ़ारूक़ लुधियाना, हाफ़िज़ मोहम्मद तस्नीम, कारी मोहम्मद अम्मार करीमी, मोहम्मद शाहिद, मोहम्मद साबिर प्रधान, मोहम्मद रफीक, अब्दुल ग़फ़्फ़ार, हाजी मोहम्मद सरफ़राज़ और हाजी शहाबुद्दीन गुलाबी बाग, नजाकत अहमद, लियाकत अहमद, मुहम्मद उसमान,हाजी हनीफ आदि के नाम उल्लेखनीय हैं।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments