मुफ़्ती-ए-आज़म पंजाब मुफ़्ती इर्तेका-उल-हसन कांधलवी कार्यक्रम की अध्यक्षता के फ़र्ज़ अंजाम देंगे।
मुफ़्ती मोहम्मद आरिफ़ लुधियानवी ने आम और ख़ास से शामिल होने की अपील की।
लुधियाना,21 नवम्बर। हाजी मोहम्मद फ़ुरकान ख़ाज़िन जमीयत उलमा ज़िला लुधियाना ने कहा कि हज़रत मौलाना मुफ़्ती सैयद मोहम्मद अफ़ान मंसूरपुरी, अध्यक्ष जमीयत उलमा उत्तरप्रदेश की लुधियाना आमद के मौक़े पर 22 नवंबर शनिवार के दिन नमाज़-ए-ईशा के बाद मदीना मस्जिद, गुलाबी बाग, टप्पा रोड लुधियाना पंजाब में एक इस्लाही कार्यक्रम रखा गया है। इसमें आम जनता के अलावा शहर के मदरसों के जिम्मेदार, मस्जिदों के इमाम, विभिन्न संगठनों के अध्यक्ष और सचिव तथा जमात-ए-तब्लीग के ज़िलाई जिम्मेदार बड़ी संख्या में शामिल होंगे। मेहमान-ए-ख़ास मौलाना मुफ़्ती सैयद मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी,निकाह की शरीई अहमियत और हमारी ज़िम्मेदारियाँ” के विषय पर लगभग डेढ़ घंटे का बसीरत अफ़रोज़ ख़िताब फरमाएँगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता और सरपरस्ती के फ़र्ज़ मुफ़्ती मोहम्मद इर्तेका-उल-हसन कांधलवी, मुफ़्ती-ए-आज़म पंजाब और मुफ़्ती मोहम्मद आरिफ़ लुधियानवी, कन्वीनर जमीयत उलमा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और चंडीगढ़ अंजाम देंगे। कार्यक्रम की शुरुआत क़ारी मुजाहिदुल इस्लाम बिजनौरी, नाज़िम इस्लाहे-मुआशरा जमीयत उलमा ज़िला लुधियाना और मौलवी मोहम्मद अनस लुधियानवी की तिलावत और नात से होगी।
मुफ़्ती-ए-शहर लुधियाना और सदर जमीयत उलमा ज़िला लुधियाना मुफ़्ती मोहम्मद आरिफ़ लुधियानवी ने मौलाना मुफ़्ती सैयद मोहम्मद अफ़ान मंसूरपुरी का संक्षिप्त परिचय कराते हुए मीडिया के प्रतिनिधियों से कहा कि मौलाना मुफ़्ती सैयद मोहम्मद अफ़ान मंसूरपुरी दौर-ए-हाज़िर के बाफ़ैज़ उलेमा और मशहूर खुतबा में से हैं। आप शैख़-उल-इस्लाम हज़रत मौलाना सैयद हुसैन अहमद मदनी (रह.) के हक़ीक़ी नवासे और हज़रत मौलाना क़ारी सैयद मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी (रह.) के साहबज़ादे हैं। वर्तमान में आप जामिआ अरबिया इस्लामिया जामिआ मस्जिद अमरोहा के शैख़-उल-हदीस और सदर-उल-मुदर्रिसीन के अज़ीम ओहदे पर फ़اईज हैं। हाल ही में आपको जमीयत उलमा उत्तरप्रदेश का सदर चुना गया है और दीऩी तालीमी बोर्ड जमीयत उलमा उत्तरप्रदेश के भी आप अध्यक्ष हैं।
मुफ़्ती-ए-शहर लुधियाना ने ज़िला लुधियाना के इमामों से अपील की कि आज नमाज़-ए-जुमे के मौक़े पर अपने नमाज़ियों को इस कार्यक्रम में शामिल होने की दावत दें, ताकि लोग मौलाना के इस क़ीमती ख़िताब से फ़ायदा उठा सकें और शादी-बियाह के मौक़े पर प्रचलित ग़ैर-ज़रूरी रस्मों से छुटकारा पाने की कोई राह निकल सके जिनमें समाज बहुत बुरी तरह जकड़ा हुआ है। मुफ़्ती-ए-शहर लुधियाना ने कहा कि इस ख़िताब को किताब की शकल में भी पेश किया जाएगा ताकि इसकी अफ़ादियत और ज़्यादा फैले।



