नवगीत -- मौसम बड़ा सुहाना स्वप्न सजीले मन अंगना में,छेड़े प्रेम तराना। सावन मनभावन ऋतु देखो,मौसम बड़ा सुहाना।। छन-छन पायल झंकृत होती, पांव महावर साजे। करधन की रुनझुन मन मेरे,जलतरंग सी बाजे।। मेहंदी लाल रची पांवों में,देख हुआ दीवाना। सावन मनभावन ऋतु देखो,मौसम हुआ सुहाना।। लाल हरी चूड़ी कंगन में,कुंदन जड़े नगीने। मुंदरी शीशे में मुख देखे,घूंघट डाले झीने।। मेहंदी पल्लव पीस हरे, गोरी हाथ रचाना।। सावन मनभावन ऋतु देखो,मौसम बड़ा सुहाना।। तन परिधान हरा सजता है,वेणी है कुंतल में, मीन डोलते दो कजरारे,गोरी दृग चंचल में।। झूमर टीका झुमके पहने,टिकुली लाल सजाना। सावन मनभावन ऋतु देखो,मौसम बड़ा सुहाना।। नीम डाल पर झूले डाले,तीज सखी है गाती। कोयल कूके चातक टेरे,श्याम घटा मदमाती। थोड़ा धीर धरो मेघा रे,अभी न नीर बहाना। सावन मनभावन ऋतु देखो,मौसम बड़ा सुहाना।। मौलिक सृजन ऋतु अग्रवाल मेरठ



