नई दिल्ली/ खन्ना । सिख धर्म के पहले शहीद, शांति के पुंज, शहीदों के सरताज, सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी की शहादत अतुलनीय है। मानवता के सच्चे सेवक, धर्म के रक्षक, शांत और गंभीर स्वभाव के मालिक गुरु अर्जुन देव अपने युग के सर्वमान्य लोकनायक थे। यह विचार आज पंजाब टाईमज़ न्यूज़ के संवाद दाता के साथ बातचीत करते हुए श्री अवतार सिंह ढिल्लों ने वयक्त किये। श्री ढिल्लों ने कहा कि वह दिन-रात संगत की सेवा में लगे रहते। उनके मन में सभी धर्मों के प्रति अथाह स्नेह था। गुरु जी ने सदैव परमात्मा पर भरोसा रखने तथा मिल-जुल कर रहने का संदेश दिया। गुरु जी के प्रचार के कारण सिख धर्म तेजी से फैलने लगा। विनम्रता के पुंज गुरु अर्जुन देव जी ने लोगों को विनम्र रहने का संदेश दिया। इन्होंने कभी भी किसी को कटु वचन नहीं बोले। इनका संगत को बड़ा संदेश था प्रभु की रजा में राजी रहना। अर्जुन देव को साहित्य से भी अगाध स्नेह था। ये संस्कृत और स्थानीय भाषाओं के प्रकांड पंडित थे। इन्होंने कई गुरुवाणी की रचनाएं कीं, जो आदिग्रन्थ में संकलित हैं। इनकी रचनाओं को आज भी लोग गुनगुनाते हैं और गुरुद्वारे में कीर्तन किया जाता है।




