माँ केवल एक शब्द नहीं
सम्पूर्ण जग का सार है
सुनो माँ की कहानी मेरी ज़ुबानी
आंचल में दूध जिस की आंखों में पानी
सहती है संतान के दुख कुछ कहती नहीं खोल के मुख
देती है संतान पर जान
पर न जाने फिर भी संतान
क्यों न मानें इसका अहसान
भगवान ने मेरी माँ को फुर्सत से बनाया होगा
ममता से सींच कर प्यार के फूलों से सजाया होगा



