Saturday, April 18, 2026
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अब इंतज़ार इस बात का है कि तारिक कासमी के लिए आजादी की सुबह कब होगीः ज़ाकिर हुसैन

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कानूनी सहायता देने वाली जमीयत -ए -उलेमा महाराष्ट्र (अरशद मदनी) विशेषकर गुलजारी आज़मी साहब के बलिदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता

आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के रहने वाले हकीम तारिक कासमी और जौनपुर,मड़ियाहूं निवासी खालिद मुजाहिद को 2007 में आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। खालिद मुजाहिद की 2012 में पुलिस हिरासत में रहस्यमय तरीके से मौत हो गई थी, जबकि हकीम तारिक कासमी की 2015 में बाराबांकी सत्र न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि सरकार द्वारा तैयार निमेष आयोग की रिपोर्ट में आरोपी तारिक कासमी को उन के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को गलत बताया था, फिर भी तारिक कासमी को रिहा नहीं किया जा सका।

लेकिन अब लंबे समय के बाद, हकीम तारिक कासमी के संबंध में मीडिया के माध्यम से खबर आई है कि लखनऊ उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। इस खबर के बाद से तारिक कासमी के परिवार और उनके शुभचिंतकों को राहत मिली है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हकीम तारिक कासमी, जो बाराबांकी की सत्र अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं,को लखनऊ उच्च न्यायालय की जिला पीठ द्वारा जमानत दी गयी है।

बाराबंकी सत्र न्यायालय ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर की गयी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार किया, लेकिन मामले में कोई प्रगति नहीं हुई, जिसके कारण आरोपी तारिक कासमी के मामले में कोई निर्णय नहीं हो सका। हालांकि, तारिक कासमी की याचिका पर अंतिम चर्चा कल शुरू हुई। जो आज सुनवाई के दौरान समाप्त हुई।

सेंटर एडवोकेट ने दोरूकनी बेंच को बताया कि 12 दिसंबर 2007 को शाम 6:20 बजे विश्वनाथ होटल रेलवे स्टेशन के पास से तीन डेटोनेटर और 20 किलो आरडीएक्स जब्त किया गया था, जिसका जांच में दावा किया गया था। तारिक कासमी उस समय वहां नहीं थे। उनपर कथित आतंकवादी संगठन हरकत अल-जिहाद अल-इस्लामी के सदस्यों को हथियार और आरडी एक्स पहुंचाया था और इस प्रतिबंधित संगठन के सदस्य है।

हालांकि तारिक पर यह आरोप साबित नहीं किया जा सका। केवल सरकारी गवाहों के बयान की बुनियाद पर सत्र न्यायलय ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में आरोपी तारिक कासमी को कानूनी सहायता देने वाली जमीयत -ए -उलेमा महाराष्ट्र (अरशद मदनी) विशेषकर गुलजारी आज़मी साहब के बलिदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अब इंतज़ार इस बात का है कि तारिक कासमी के लिए आजादी की सुबह कब होगी?

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