नई दिल्ली,25 फरवरी। पर्तीतपुर धरमावाला की आयशा मस्जिद के इमाम मौलाना अरशद रशीदी साहब ने रमज़ान मुबारक की अज़मत व फ़ज़ीलत पर रोशनी डालते हुए कहा कि रमज़ान मुबारक अल्लाह तआला की तरफ़ से एक अज़ीम नेमत और रहमतों, बरकतों और मग़फ़िरतों का महीना है। यह वह बाबरकत महीना है जिसमें जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं, जहन्नम के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं और शैतानों को क़ैद कर दिया जाता है।
मौलाना ने फरमाया कि हमें चाहिए कि इस महीने की क़दर करें, क्योंकि मालूम नहीं अगला रमज़ान हमारी ज़िंदगी में आए या न आए। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि रमज़ान मुबारक के एक-एक लम्हे को ग़नीमत जाने और अपने वक़्त को इबादत, तिलावत-ए-कुरआन, ज़िक्र व अज़कार और नेक आमाल में खर्च करे।
आपने मज़ीद फरमाया कि रमज़ान सिर्फ़ भूखा और प्यासा रहने का नाम नहीं बल्कि यह सब्र, तक़वा और अपने नफ़्स की इस्लाह का महीना है। इस महीने में हमें अपनी ज़बान की हिफ़ाज़त करनी चाहिए, झूठ, ग़ीबत और फ़ुज़ूल बातों से बचना चाहिए, क्योंकि रोज़े का अस्ल मक़सद इंसान के अंदर तक़वा पैदा करना है। अगर इंसान भूखा-प्यासा रहकर भी अपने अख़लाक़ और आमाल की इस्लाह न करे तो वह रमज़ान के अस्ल मक़सद से महरूम रह जाता है।
मौलाना ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि रमज़ान मुबारक हमदर्दी और ग़मख़्वारी का महीना है। इस महीने में हमें ग़रीबों, मिस्कीनों और ज़रूरतमंदों का ख़ास ख़याल रखना चाहिए और उनकी मदद करनी चाहिए, क्योंकि सदक़ा व ख़ैरात और दूसरों के साथ भलाई करना अल्लाह तआला को बहुत महबूब है।
आख़िर में आपने हाज़िरीन को नसीहत करते हुए फरमाया कि रमज़ान मुबारक को ग़फ़लत में न गुज़ारें बल्कि तौबा व इस्तिग़फ़ार करें, अपने गुनाहों पर नदामत का इज़हार करें और अल्लाह तआला से तअल्लुक़ मज़बूत करें। जो शख़्स इख़लास के साथ इस महीने में इबादत करता है, अल्लाह तआला उसके गुनाहों को माफ़ फरमा देता है और उसके दर्जात बुलंद कर देता है।
अल्लाह तआला हमें रमज़ान मुबारक की क़दर करने, उसकी बरकतें समेटने और उसके तकाज़ों पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।



