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जमीअत उलमा पंजाब के मुख्यालय में महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रशिक्षण एवं परामर्श बैठक का आयोजन

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पंजाब में गठित सभी 23 इकाइयों में क्रमबद्ध तरीके से जमीअत उलमा के प्रशिक्षण और सुधारात्मक कार्यक्रम बड़े पैमाने पर किये जाने का लिया फैसला

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मालेरकोटला,28 जुलाई। जमीअत उलमा पंजाब के मुख्यालय, जामिया इस्लामिया मदरसा ज़ैनतुल उलूम, रायकोट रोड, मालेरकोटला में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रशिक्षण एवं परामर्श बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता मौलाना मुफ्ती मोहम्मद खलील कासमी साहब (अध्यक्ष, जमीअत उलमा पंजाब, चेयरमैन पंजाब स्टेट हज कमेटी और सदस्य शूरा दारुल उलूम देवबंद) ने की। इस बैठक में विशेष रूप से पंजाब के प्रत्येक जिले के अध्यक्ष और सचिवों को आमंत्रित किया गया था।

कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन की तिलावत से हुई। नात-ए-नबी के कुछ अशआर कारी मोहम्मद अरशद सलमह ने अपनी मधुर और सुरीली आवाज में प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन मौलाना मुफ्ती वसीम अकरम कासमी, अध्यक्ष जमीअत उलमा जिला संगरूर, ने किया और उन्होंने अध्यक्ष की अनुमति से कार्यक्रम के एजेंडे पर प्रकाश डाला।

जमीअत उलमा हिंद के अध्यक्ष, कायद-ए-मिल्लत, अमीर-उल-हिंद, उस्ताद-ए-मोहतरम, शैख-उल-इस्लाम के उत्तराधिकारी, मौलाना सैयद अरशद मदनी साहब की दिशा-निर्देशों के अनुसार, पंजाब के सभी जिलों में जहां भी आवश्यकता हो, वहां दीनी मकातिब (धार्मिक स्कूल) स्थापित करने और जहां मस्जिदों के इमामों की तनख्वाह इतनी कम है कि उनका गुजारा मुश्किल से होता है और उनके पास कोई अन्य आय का स्रोत नहीं है, साथ ही स्थानीय लोग भी अधिक तनख्वाह देने में असमर्थ हैं, इन दोनों महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में उपस्थित सभी जिला अध्यक्षों और महासचिवों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई कि वे अपने-अपने जिलों का दौरा करें, स्थिति का जायजा लें और अपने क्षेत्र की एक सूची तैयार करके प्रांतीय कार्यालय को भेजें, ताकि जमीअत उलमा हिंद की ओर से जल्द से जल्द इन क्षेत्रों में मकातिब की स्थापना की जा सके और राष्ट्र व समुदाय के मासूम बच्चों को कुरआन और सुन्नत की शिक्षा से सुसज्जित किया जा सके।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि पंजाब के सभी 23 जिलों में गठित सभी इकाइयों के जिम्मेदारों और पदाधिकारियों के लिए जमीअत उलमा की ओर से आईडी कार्ड, लेटरहेड आदि बनाए जाएं। इसके साथ ही जल्द ही जमीअत उलमा पंजाब द्वारा एक मुस्लिम फंड शुरू किया जाएगा, जिसके माध्यम से गरीबों, अनाथों, विधवाओं और सभी धर्मों के जरूरतमंदों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए उनकी सहायता की जाएगी।

बैठक की सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह थी कि पंजाब को संयुक्त पंजाब से अलग किया जाए। यह प्रस्ताव मौलाना मुज्तबा यजदानी साहब ने पेश किया, जिसका सभी उपस्थित लोगों ने पूर्ण समर्थन और उत्साह के साथ अनुमोदन किया। इस अवसर पर यह बताना भी आवश्यक है कि जिन शर्तों के अभाव में पंजाब को हरियाणा, हिमाचल और चंडीगढ़ के साथ जोड़ा गया था, वे सभी शर्तें अब पंजाब में पूर्ण रूप से पूरी हो रही हैं। अल्हम्दुलिल्लाह। इसीलिए, पंजाब के सभी जमीअत उलमा कार्यकर्ताओं का जमीअत उलमा हिंद के जिम्मेदारों, विशेष रूप से कायद-ए-मिल्लत से यह अनुरोध है कि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पंजाब को स्थायी प्रांत का दर्जा प्रदान किया जाए, ताकि संगठन के कार्यों में और मजबूती और सुविधा हो सके।

यह उल्लेखनीय है कि जमीअत उलमा हिंद के संविधान में यह उल्लेख है कि किसी भी प्रांत को स्वतंत्र और स्थायी प्रांत का दर्जा देने के लिए कम से कम ढाई लाख सदस्यों की सदस्यता आवश्यक है। इस कार्यकाल में पंजाब के सभी जिलों में मौलाना मुफ्ती-ए-आज़म पंजाब की अगुवाई में जमीअत उलमा की जिला इकाइयों के गठन के साथ-साथ सदस्यता अभियान में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, और लगभग साढ़े चार लाख लोगों को सदस्यता अभियान से जोड़ा गया है। दूसरी शर्त यह है कि किसी प्रांत को स्वतंत्र दर्जा देने के लिए उसके प्रत्येक जिले में इकाई का गठन आवश्यक है। अल्हम्दुलिल्लाह, इस कार्यकाल में पंजाब के सभी जिलों में इकाइयों का गठन भी पूरा हो चुका है।

बैठक में यह संकल्प भी लिया गया कि पंजाब में गठित सभी 23 इकाइयों में क्रमबद्ध तरीके से जमीअत उलमा के प्रशिक्षण और सुधारात्मक कार्यक्रम बड़े पैमाने पर आयोजित किए जाएंगे। इंशाअल्लाह।

जमीअत उलमा पंजाब के महासचिव मौलाना मुफ्ती मोहम्मद यूसुफ कासमी ने अपनी वार्षिक कार्यप्रदर्शन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के साथ-साथ यह प्रस्ताव भी रखा कि कायद-ए-मिल्लत, अध्यक्ष जमीअत उलमा हिंद से समय लेकर जल्द ही पूरे पंजाब का एक ऐतिहासिक सम्मेलन मालेरकोटला की धरती पर आयोजित किया जाए। इस प्रस्ताव पर उपस्थित सभी लोगों ने खुशी का इजहार किया और बड़े उत्साह के साथ इसका समर्थन किया।

जमीअत उलमा पंजाब के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती मोहम्मद खलील कासमी, मुफ्ती-ए-आज़म पंजाब और सदस्य शूरा दारुल उलूम देवबंद, ने अपने अध्यक्षीय भाषण में संगठन के संदेश को घर-घर तक पहुंचाने और कार्य को और अधिक सक्रिय व मजबूत करने पर जोर दिया। साथ ही, आपसी भाईचारा और प्रेम को मजबूत करने का आदेश दिया। इसके अलावा, जमीअत उलमा के बैनर तले प्रत्येक जिले में सामाजिक सुधार के लिए कार्यक्रम आयोजित करने का भी निर्देश दिया।

इस अवसर पर जमीअत उलमा पंजाब के सभी कार्यक्रमों की उत्कृष्ट मीडिया कवरेज के लिए  पत्रकार मौलाना मज़हर आलम स, मास्टर यासीन साहब मालेरकोटला, जमीअत उलमा के कोर्ट संबंधी मामलों की उत्कृष्ट पैरवी के लिए एडवोकेट नईम खान , पंजाब के एडीजीपी फियाज़ फारूकी साहब (पूर्व प्रशासक पंजाब वक्फ बोर्ड) के पीए मोहम्मद जमीस साहब जालंधरी, और मानसा शहर से आए एचआर मोफरखान साहब आदि का मुफ्ती-ए-आज़म पंजाब ने अपने हाथों से सम्मान किया। अंत में, अध्यक्ष महोदय की दुआ के साथ इस प्रकाशमय सभा का समापन हुआ।

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