इमाम नासिर में सैय्यद इमाम नासिरउद्दीन शाह की दरगाह पर 1110 वां मनाया गया उर्स
जालंधर। जालंधर के ऐतिहासिक स्थानों की बात आई तो सबसे पहले नाम आया था इमाम नासिर मस्जिद का। इमाम नासिर मस्जिद जालंधर के ग्रैंड ट्रंक रोड पर स्थित है। यह करीब लगभग 800 साल पुरानी है। इतिहासकारों के अनुसार यहां पर 40 दिनों के लिए बाबा फरीद ने शरण ली थी, जिसके चलते स्थान को और भी पवित्र माना जाता है। यही कारण है कि पाकिस्ताने के लोग इस मस्जिद के बारे में जानने को उत्सुक रहते हैं। उसी के मद्देनज़र आज इमाम नासिर में सैय्यद इमाम नासिरउद्दीन शाह की दरगाह पर 1110 वां उर्स मनाया गया।
अजमेर शरीफ वाले ख्वाजा मोईनूद्दीन चिश्ती से भी पहले इमाम नासिरउद्दीन शाह भारत में इस्लाम की तबलीग के लिए पहुंचे थे। दरगाह के इतिहास के मुताबिक सैय्यद इमान नासिरउद्दीन शाह बहुत बड़े थे और खुद बाबा फरीद उनके पास जालंधर दरगाह में 40 दिन का चिल्ला करके गए थे।
वहीं मीडीया को संबोधित करते हुए जनाब अकबर अली ने कहा कि सूफियों की शिक्षाओं में अमन-शांति ओैर भाईचारे की तालीम पर ज़ोर दिया जाता रहा है। इस खास मोैके पर तुर्की ओैर सीरिया के भुकंप पीडि़तों के परिवार वालों के लिए भी दुआ की गई।
इस मौके पर दरगाह पर हाज़िरी के लिए पहुंचने वालों में मोहम्मद अकबर अली,प्रधान विपन सभरवाल ,विक्की गिल, मोहम्मद रईस, मोहम्मद मूसा, मोहम्मद रफीक मोहम्मद ईसा मोहम्मद, तबरेज, मौलाना सलीम रिज़वी. मौलाना मूसा रज़ा, हाफ़िज़ आमिर रज़ा, तारिक अनवर, मोहम्मद शकील, हैदर अली, मंजूर आलम, मोहम्मद सोहेल, नैशनल ह्यूमन राईटस सोशल जस्टिस फरंट के सटेट कार्यकारी सदस्य श्री मनसूर आलम, मोहम्मद ,नईम पहुंचे।



