चंडीगड़। सतलुज-यमुना लिंक मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में बड़ी सुनवाई होने वाली है।आज की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। 4 जनवरी को केंद्र के नेतृत्व में पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने बैठक की। जिसमें कोई हल नहीं निकला।
दरअसल, 1966 में पंजाब को हरियाणा से अलग करने के कारण सतलुज-यमुना लिंक विवाद भी खड़ा हो गया था। सतलुज को यमुना से जोड़ने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में 1982 में नहर का निर्माण भी शुरू हुआ था। उन्होंने इसकी शुरुआत पंजाब के पटियाला जिले के गांव कपूरी से की।
सतलुज-यमुना लिंक के तहत 214 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण किया जाना है। 122 किलोमीटर नहर पंजाब में है और शेष 92 किलोमीटर हरियाणा में बनाई जानी है। हालाँकि, दोनों राज्यों के बीच विवादों के कारण यह योजना दशकों से ठप पड़ी है।
याद रहे कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दोनों राज्यों के बीच मध्यस्थता कर विवाद सुलझाने का आदेश दिया था। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच चार जनवरी को होने वाली बैठक से पहले ही हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच बैठक हो चुकी है लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। लेकिन ये मामला सुप्रीम कोर्ट में रहा, जिसके बाद आज यानी 19 जनवरी को एक बार फिर इस मामले की सुनवाई होने वाली है



