मुंबई। एम.जी. रामचंद्रन। ये तमिल फिल्मों के सुपर स्टार भी रहे और तमिलनाड़ु के मुख्यमंत्री भी। आज एम.जी. रामचंद्रन की 106वीं बर्थ एनिवर्सरी है।एम.जी. रामचंद्रन पहले ऐसे स्टार थे जिनकी फैन फॉलोइंग ने दुनिया को चौंका दिया था। पहली बार ये महसूस किया गया कि किसी फिल्म स्टार के लिए फैन इतने दीवाने हो सकते हैं। ऐसे कई मौके आए, जब लोगों में उनकी दीवानगी का आलम देखने को मिला।
एम.जी. रामचंद्रन जब एक्टर थे तो उनकी फिल्में रिकॉर्ड तोड़ कमाई करती थीं। राजनीति में आए तो मुख्यमंत्री बने। उनके फैंस उन्हें चमत्कारी मानते थे, फैंस को लगता था कि अगर एम.जी. रामचंद्रन किसी बंजर जमीन पर खड़े हो जाएंगे तो वो उपजाऊ हो जाएगी। इस कारण कई लोग उन्हें अपने यहां सिर्फ बंजर जमीन को हरा-भरा बनाने के लिए आने का न्योता देते थे।
जब उनकी किडनी खराब हुई तो ये खबर सुनकर ही 13 फैंस ने सुसाइड कर ली। जे. जयललिता से उनके रिश्ते हमेशा सुर्खियों में रहे। जब एम.जी. रामचंद्रन की मौत हुई तो 30 फैंस ने जान दे दी। अंतिम संस्कार में 12 लाख फैन शामिल हुए। लोग इतने दुःखी थे कि उन्होंने दुःख और गुस्से में उपद्रव मचाना शुरू कर दिया। दुकानें, बसें, गाड़ियां जलाईं। इस दंगे में 29 लोगों की मौत हो गई और 49 पुलिसकर्मी गंभीर घायल हुए।
ये सब रोकने के लिए सरकार को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी करना पड़ा। एम.जी. रामचंद्रन के इस अंतिम संस्कार को आज भी मोस्ट वॉयलेंट फ्यूनरल ऑफ द सेंचुरी (सदी का सबसे हिंसक अंतिम संस्कार) माना जाता है।
एम.जी. रामचंद्रन हमेशा से ही जनता के लिए एक मसीहा बनकर काम करते रहे। जब उनकी आमदनी कम थी तब भी आय का बड़ा हिस्सा लोगों की मदद के लिए इस्तेमाल किया करते थे। एक रिपोर्ट के अनुसार 1950 में MGR ने एक रिक्शेवाले को बारिश में भीगते हुए रिक्शा चलाते देखा। ये देखने के बाद उन्होंने चेन्नई के 6,000 रिक्शेवालों को बरसाती दान की। 1950 में एक बरसाती की कीमत 10 रुपए थी।
50 हजार लोगों की भीड़ और मातम का शोर
जैसे ही MGR को गोली लगने की खबर आई तो एक घंटे में ही 50 हजार फैंस अस्पताल के बाहर इकट्ठा हो गए। लोग सड़कों पर मातम मना रहे थे और रोने-चीखने की आवाजों से सड़कें गूंज रही थीं। भीड़ इतनी थी कि पुलिस और दूसरी गाड़ियां भी अस्पताल के नजदीक नहीं जा पा रही थीं। भीड़ रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स को बुलाया गया था।
शहर में मातम ऐसा था कि बड़ी संख्या में दुकानें बंद हो गईं और कर्फ्यू जैसा माहौल हो गया। जैसे ही फैंस को पता चला कि राधा ने MGR पर गोली चलाई है तो भीड़ उसके घर पहुंची और लोगों ने घर में खूब तोड़फोड़ की। MGR 6 हफ्तों तक अस्पताल में भर्ती रहे और उन सभी दिनों अस्पताल के बाहर भीड़ का यही आलम रहा। MGR पर गोली चलाने वाले राधा को पहले 7 साल की सजा हुई, लेकिन बाद में सजा कम कर दी गई।
1977 में बने तमिलनाडु के सीएम
एम.जी. रामचंद्रन की पार्टी ने 1977 में 234 में से 130 सीटें हासिल कीं और MGR तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। कुछ सालों बाद एम.जी. रामचंद्रन ने जे. जयललिता को कॉल किया और उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने की बात कही। सालों बाद MGR की आवाज सुन रहीं जयललिता झट से मान गईं। पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया और MGR को जयललिता को पद से हटाना पड़ा। एम.जी. रामचंद्रन ने जयललिता को हर कदम पर साथ रखा, शायद यही कारण था कि जब MGR की मौत हुई तो जयललिता 21 घंटों तक उनके शव के पास खड़ी रहीं।



